Biodiversity Meaning In Hindi: जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास के कारण

Biodiversity Meaning In Hindi: भूमण्डल जैव-विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है विश्व में अब तक लगभग 15 लाख प्रजातियों का निर्धारण किया जा चुका है अनेक प्रजातियां अज्ञात हैं जिनकी अनुमानित संख्या लगभग 50 लाख है जैव-विविधता पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संतुलन के साथ-साथ मानव के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है जैव विविधता जितनी अधिक होती है स्थिति की तंत्र उतना ही बेहतर और व्यापक आधार वाला होता है ।

Biodiversity Meaning In Hindi: जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास के कारण
Biodiversity Meaning In Hindi: जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास के कारण

यह मानव के लिए भोजन, दवाई सहित विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करती है बड़े पैमाने पर औद्योग के कारण वनों का विनाश भूमंडलीय तापन एवं जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना एवं प्रदूषण आदि के कारण जैव विविधता की व्यापक हानि हो रही है वैश्विक स्तर पर पेड़ों का काटा जाना प्रोटोकॉल नागोया सम्मेलन आदि के द्वारा जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रयास किया जा रहे हैं भारत सरकार द्वारा भी जैव विविधता संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के प्रावधान किए गए हैं..

Biodiversity Meaning In Hindi (जैव-विविधता)

“किसी प्राकृतिक प्रदेश में पाई जाने वाली जीव जंतुओं तथा पादपो की प्रजातियां की बहुलता को जैव विविधता कहते हैं” सर्वप्रथम 1985 ईस्वी में W.G. Rosen ने जैव विविधता शब्द का प्रयोग किया था

संकल्पना के रूप में इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ई.ओ. विल्सन कीट वैज्ञानिक ने 1986 ईस्वी में जैव विविधता पर अमेरिकी फॉर्म के लिए प्रस्तुत प्रतिवेदन में किया था

जैव-विविधता का स्तर 

निम्नलिखित तीन स्तरों में विभाजित किया गया है

  1. अनुवांशिक विविधता :- प्रत्येक प्रजाति में अनुवांशिक संरचना के आधार पर विविधता जैसे मनुष्य मनुष्य में जीन् संबंधी विभिन्नता
  2. प्रजाति विभिन्नता :- विभिन्न प्रकार के जीवो में विविधता जैसे मनुष्य, मछली, गाय, पक्षी, आदि प्रजातियाँ है में विभिन्नता पाई जाती है। 
  3. पारिस्थितिकी तंत्र :- विविधता विभिन्न भौगोलिक परिवेश के आधार पर पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्नता जैसे झील, मरुस्थल, मैदान आदि

जैव विविधता का परिदृश्य

सर्वप्रथम ब्रिटेन के पल विलियम्स क्रिस हमस तथा डिक्वान राइट ने जैव विविधता के परिदृश्य हेतु अर्थात मानचित्र कारण वर्ल्ड मैप नमक सॉफ्टवेयर विकसित किया

प्रजाति समृद्धिता डाटा के आधार पर जैव विविधता मापन की तीन विधियां हैं

  1. अल्फा विविधता :- यह किसी क्षेत्र विशेष में उपस्थित प्रजातियों की कुल संख्या को प्रदर्शित करती है। 
  2. बीटा विविधता :- यह किसी क्षेत्र में विशेष में उपस्थित प्रजातियों की संरचना-विविधता को प्रदर्शित करती है।
  3. गामा विविधता :- यह किसी क्षेत्र विशेष में उपस्थित प्रजातियों के मध्य होने वाली अंतः क्रिया को प्रदर्शित करती है।

भूमंडलीय जैव-विविधता

  • भूमंडलीय जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है
  • अब तक विश्व के लगभग 15 लाख स्पीशीज का निर्धारण किया जा चुका है
  • अनेक प्रजातियां अज्ञात हैं जिनकी अनुमानित संख्या 50 लाख या इससे अधिक है
  • स्थलाकृति तथा जलवायु संबंधी विशेषता के कारण वैश्विक स्तर पर जैव विविधता में व्यापक विभिन्नता है
  • उष्णकटिबंधीय स्थलीय एवं जलीय भाग प्रवाल भित्ति क्षेत्र तथा आद्र भूमि जैव-विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्धसाली है
  • निम्नतम अक्षांशों में उच्चतर अक्षांशों की तुलना में जैव विविधता अधिक होती है
  • पर्वतीय क्षेत्रों में उच्चतर उन्नतांशो (चोटियों) की तुलना में निम्नतर उन्नतांशो घाटियों में जैव विविधता अधिक होती है
  • उष्णकटिबंधीय वर्षा वन जैव-विविधता की दृष्टि से सर्वाधिक समृद्धशाली हैं इन्हें जैव विविधता का भंडार कहा जाता है
  • उष्णकटिबंधीय वर्षा वन विश्व के मात्र 13% भू-भाग पर फैले हैं परंतु यहां विश्व की 50% से अधिक स्पीशीज विद्यमान हैं
  • अनुकूल परिस्थितियों के अभाव में अप- ध्रुवीय एवं मरुस्थलीय क्षेत्र में जैव विविधता का स्तर बहुत कम है
  • उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव के चतुर्थंश का बर्फ अक्षादित क्षेत्र को अत्यंत न्यूनतम जैव विविधता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है

भारतीय जैव-विविधता

  • भारत विश्व के 18 विशाल जैव विविधता वाले देश में से एक है जहां विश्व की 60-70% जैव विविधता है
  • जैव विविधता संबंधी प्रतिवेदन 2011 के अनुसार विश्व के समस्त वनस्पति प्रजाति में से लगभग 4700 पादप प्रजातियां तथा विश्व के समस्त जंतु प्रजातियों का लगभग 91912 जंतु प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं
  • इस प्रकार विश्व के समस्त पादप प्रजाति का 74.5% तथा जंतु प्रजाति का 7.4% भारत में पाई जाती है
  • भारत के वनों में ब्राजील के पश्चात सर्वाधिक जैव विविधता है
  • पश्चिमी घाट एवं पूर्वी घाट जो विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्धि साली है
  • भारत के अण्डमान-निकोबार दीप समूह, असम, छत्तीसगढ़ अथवा झारखंड आदि स्थल भी जैव विविधता की दृष्टि से संपन्न है।
  • 18 फरवरी 1994 ई को भारत ने जैव विविधता संबंधी अंतरराष्ट्रीय संधि का समर्थन किया और मैं 1994 में इसका सदस्य बना
  • 6 जनवरी 2002 को जैव विविधता संरक्षण के उद्देश्य से राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम 2002 के अंतर्गत 1 अक्टूबर 2003 को गजट अधिसूचना द्वारा चेन्नई में एक राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण गठित किया गया

जैव-विविधता का महत्व (Biodiversity Importance)

जैव-विविधता (Biodiversity) मानव एवं पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है निम्नलिखित रूप में उपयोगी माना जाता है जैसे-

  • प्रकाश संश्लेषण, ड्रग्स और दवाइयां, खाद्य-पदार्थ परिस्थितिकी संतुलन अपशिष्ट का पुनः चक्करण, शस्य परगना, आर्थिक रूप से उपयोगी कीट नियंत्रण रासायनिक चक्र पोषण चक्र मृदा निर्माण आदि ।

जैव-विविधता ह्रास्य के कारण

जैव विविधता ह्रास्य के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं

  1. प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना
  2. वनों का विनाश होना
  3. जिनांतरित बीजों का विस्तार
  4. अनियंत्रित पशु चराई
  5. प्रदूषण
  6. जलवायु परिवर्तन
  7. आक्रमणकारी विदेशी प्रजातियां
  8. वन्य जीव का अवैध शिकार
  9. स्थानांतरित कृषि आदि
Biodiversity Meaning In Hindi: जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास के कारण
Biodiversity Meaning In Hindi: जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास के कारण

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जैव विविधता के संवेदनशील स्थल :- 

ऐसे प्राकृतिक स्थल जहां आदिवासीय जातियों की पर्याप्त संख्या है और उनके अधिवास के कारण उसे स्थल के प्राकृतिक निवासी तथा वनस्पतियों की विभिन्न प्रजातियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया हो, को जैव विविधता दृष्टि से संवेदनशील स्थल कहा जाता है।

  • सर्वप्रथम ब्रिटिश पर्यावरण विद नॉरमल मायर्स ने 1988 ईस्वी में संवेदनशील स्थल या हॉटस्पॉट शब्द का प्रयोग किया
  • नॉर्मल मेयर के अनुसार जहां स्थलीय जातियों की संख्या आनुपातिक रूप से अधिक होती है वहां वासन की विनाश दर ऊंची होती है
  • विश्व में अब तक 34 संवेदनशील स्थल चिन्हित किया जा चुके हैं
  • Biodiversity Hotspot In India : भारत के दो स्थल पश्चिमी घाट और पूर्वी हिमालय विश्व के संवेदनशील स्थलों में शामिल हैं

पश्चिमी घाट

  • यह भारत का प्रथम संवेदनशील स्थल है
  • पश्चिमी घाट भारतीय प्रायद्वीप के समांतर लगभग 1600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है
  • इसका विस्तार श्रीलंका तक है
  • इसके अंतर्गत भारत के गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्य आते हैं
  • केरल में अगस्त्यमलाई की पहाड़िया शांत घाटी तथा अंबालम जैव विविधता की दृष्टि से प्रमुख क्षेत्र हैं।

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