Dhan Vidheyak Kya Hai: धन विधेयक क्या है

धन विधेयक के विषय में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-110 में परिभाषित किया गया है संसद के विधायी शक्तियों के अंतर्गत आती हैं Dhan Vidheyak Kya Hai: धन विधेयक क्या है इस आर्टिकल के माध्यम से सांसद की विधायी शक्तियों के अंतर्गत साधारण विधेयक (Ordinary Bill), धन विधेयक (money bill) के विषय में तुलनात्मक अध्यन करेंगे

Dhan Vidheyak Kya Hai: धन विधेयक क्या है
Dhan Vidheyak Kya Hai: धन विधेयक क्या है

क्रमांक

साधारण विधेयक ( Ordinary Bill )

धन विधेयक ( Money Bill )

साधारण विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है

जबकि धन विधेयक को केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है

साधारण विधायक को मंत्री द्वारा या गैर सरकारी सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया जाता है

जबकि धन विधेयक को सिर्फ मंत्री द्वारा ही प्रस्तुत किया जाता है

साधारण विधायक राष्ट्रपति के बिना संज्ञान ही प्रस्तुत किया जा सकता है

परंतु धन विधेयक राष्ट्रपति के सहमति से ही प्रस्तुत किया जा सकता है

 

साधारण विधेयक राजसभा द्वारा संशोधित या अस्वीकृत किया जा सकता है

परंतु धन विधेयक को राज्यसभा द्वारा कोई भी संशोधन या स्वीकृति नहीं दे सकते

साधारण विधेयक को राजसभा अधिकतम 6 माह तक के रोक सकती है

जबकि धन विधेयक को राष्ट्रवाद अधिकतम 14 दिन के लिए रोक सकती है

 

साधारण विधेयक किस राज्यसभा में भेजने के लिए अध्यक्ष के प्रमाण की जरूरत नहीं होती है

जबकि धन विधेयक को राज्यसभा में भेजने के लिए अध्यक्ष के प्रमाण की जरूरत होती है

 

साधारण विधायक दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है असहमति की अवस्था में राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है

परंतु धन विधेयक के मामले में लोकसभा से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है इसमें दोनों सदनों के बीच असहमति का कोई असर नहीं होता है इसलिए संयुक्त बैठक का कोई उपबंध नहीं है

 

साधारण विधेयक लोकसभा में आज स्वीकृत होने पर सरकार को त्यागपत्र देना पड़ सकता है

परंतु धन विधेयक लोकसभा में अस्वीकृत होने पर सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है

 

साधारण विधेयक अस्वीकृत पारित या राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए भेजा जा सकता है

परंतु धन विधेयक अस्वीकृति या पारित तो किया जा सकता है लेकिन राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटाया नहीं जा सकता है

Dhan Vidheyak Kya Hai: धन विधेयक क्या है

 What is money bill धन विधेयक (Money Bill in Hindi ) के संबंध में लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम निर्णय होता है, उसके निर्णय को किसी न्यायालय, सांसद या राष्ट्रपति द्वारा चुनौती नहीं दी जा सकती जब धन विधेयक राज सभा या राष्ट्रपति के पास स्वीकृति हेतु जाता है तो लोकसभा अध्यक्ष से धन विधेयक (Dhan Vidheyak) के रूप में पृष्ठांकन करता है संविधान के Money Bill Article (अनुच्छेद-110 में धन विधेयक) की परिभाषा को बताया गया है जिसके अंतर्गत निम्नलिखित उपबंधों मे से एक का होना आवश्यक है-

  • भारत की संचित निधि से धन का विनियोग
  • भारत की संचित निधि आकस्मिता निधि को अभिरक्षा ऐसी किसी निधि में धन जमा करना या उसमें से धन निकालना
  • केंद्र सरकार के द्वारा उधार लिए गए धन का विनियमन
  • भारत की संचित निधि पर भारत किसी व्यक्ति उद्घोषणा या इस प्रकार के किसी व्यक्ति राशि में वृद्धि
  • किसी कर या अधिरोपण, उत्पादन, परिहार परिवर्तन या विनियमन
  • भारत की संचित निधियां लोकलेखा में किसी प्रकार के धन की प्राप्ति या अभिरक्षा या इसे वह या इनका केंद्रीय राज्य की निधियां का लेखा परीक्षण

धन विधेयक के पारित होने के संबंध में :-

संविधान में संसद द्वारा धन विधेयक को पारित करने के संबंध में एक विशेष प्रक्रिया विहित है धन विधेयक केवल लोकसभा में केवल राष्ट्रपति की सिफारिश से ही प्रस्तुत किया जा सकता है इस प्रकार के प्रत्येक विधायक को सरकारी विधेयक माना जाता है तथा इसे केवल मंत्री ही प्रस्तुत कर सकता है|

  1. लोकसभा में पारित होने के उपरांत से राज्यसभा में विचार विमर्श के लिए भेजा जाता है राज्यसभा के पास धन विधेयक  के संबंध में प्रतिबंधित शक्तियां हैं यह धन विधेयक को अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती यह केवल सिफारिश कर सकती है
  2. 14 दिन के भीतर उसे इस पर स्वीकृति देनी होती है अन्यथा वह राजसभा द्वारा पारित समझा जाता है लोकसभा के लिए या आवश्यक नहीं होता है कि वह राज्यसभा की सिफारिश को स्वीकार ही करें
  3. यदि लोकसभा किसी प्रकार की सिफारिश को मान लेती है तो फिर इस संशोधन विधेयक को दोनों सदनों द्वारा संयुक्त रूप से पारित समझा जाता है लेकिन यदि लोकसभा किसी प्रकार की सिफारिश को नहीं मानती है तो फिर इसे मूल रूप से दोनों सदनों द्वारा संयुक्त रूप से पारित समझा जाता है
  4. यदि राजसभा इस विधायक को 14 दिन तक वापस नहीं करती है तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित समझा जाता है जब धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्ति काफी सीमित है दूसरी ओर साधारण विधायक के मामले में दोनों सदनों को सामान शक्ति प्रदान की गई है
  5. अंतिम रूप से धन विधेयक को राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया जाता है तो वह या तो इस पर अपनी स्वीकृति दे देता है या फिर इसे रोक कर रख सकता है लेकिन वह किसी भी दशा में इसे विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता सामान्य यह लोकसभा में प्रस्तुत करने से पहले जब राष्ट्रपति की सहमति ली जाती है तो यह माना जाता है कि राष्ट्रपति इससे सहमत है और वह इसे  सहमति दे भी देते हैं

साधारण विधेयक क्या है: What is Ordinary Bill :-

वित्तीय विषयों के अलावा उन सभी विषयों से संबंध विधेयक साधारण विधायक कहलाते हैं, साधारण विधेयक की प्रस्तुति तथा प्रस्ताव को पारित करने के लिए सरल भाषा में समझने के लिए पांच चरणों में विभाजित किया गया है

  1. प्रथम वाचन :- साधारण विधेयक संसद के किसी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है यह विधायक मंत्री या सांसद किसी के द्वारा भी प्रस्तुत किया जा सकता है जब कोई सदन में यह विधायक प्रस्तुत करना चाहता है तो उसे पहले सदन को अग्रिम सूचना देनी पड़ती है जब सदन इस विधायक को प्रस्तुत करने की अनुमति देते हैं तो प्रस्तुत करता है इस विधेयक को शीर्षक एवं इसका उद्देश्य बताता है इस चरण में विधेयक पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं होती बाद में इस विधेयक को भारत के राज्य पत्र में प्रकाशित किया जाता है यदि विधेयक प्रस्तुत करने से पहले ही राज्य पत्र में प्रकाशित हो जाए तो विधेयक को संबंध में सदन की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती विधेयक का प्रस्तुतीकरण एवं इसका राजपत्र में प्रकाशित होना ही प्रथम पाठन कहलाते हैं

2.द्वितीय वाचन :- इस चरण में विधेयक की न केवल सामान्य बिल की विस्तृत समीक्षा की जाती है इस चरण में विधायक की अंतिम रूप प्रदान किया जाता है विधायक के प्रस्तुतीकरण की दृष्टि से यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है वास्तव में चरण के तीन उपचारण होते हैं जिनके नाम –

  • साधारण बहस की अवस्था
  • समिति द्वारा जांच अथवा
  • विचारणीय अवस्था

3.तृतीय वाचन:- इस चरण में केवल विधायक को स्वीकार या अस्वीकार करने के संबंध में चर्चा होती है तथा विधेयक में कोई संशोधन नहीं किया जा सकता यह सदन बहुमत से पारित कर देता है तो विधायक पारित हो जाता है इसके उपरांत उसे सदन के पीठासीन अधिकारी द्वारा विधेयक पर विचार एवं स्वीकृति के लिए उसे दूसरे सदन में भेजा जाता है दोनों सदनों द्वारा पारित होने के उपरांत इसे संसद द्वारा पारित समझा जाता है

4.दूसरे सदन में विधायक :- एक सदन से पारित होने के उपरांत दूसरे सदन में भी विधेयक का प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पाठन होता है इस संबंध में दूसरे सदन के समक्ष निम्न चार विकल्प होते हैं-

  • यह विधेयक को इस रूप में पारित कर प्रथम सदन को भेज सकता है अर्थात बिना संशोधन के
  • यह विधेयक को संशोधन के साथ पारित करके प्रथम सदन को पुनः विचार विमर्थ के लिए भेजा जा सकता है
  • यह विधेयक को अस्वीकार कर सकता है
  • यह विधेयक पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही ना करके उसे लंबित कर सकता है

यदि दूसरा सदन किसी प्रकार के संशोधन के साथ विधेयक को पारित कर देता है या प्रथम सदन उन संशोधन को स्वीकार कर लेता है तो विधायक दोनों सदनों द्वारा पारित समझा जाता है तथा इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा दिया जाता है

दूसरी ओर यदि द्वितीय सदन द्वारा इस किए गए संशोधन को प्रथम सदन स्वीकार कर देता है या द्वितीय सदन विधेयक को पूर्ण रूप अस्वीकार कर देता है या द्वितीय सदन 6 माह तक कोई कार्यवाही नहीं करता है तो गतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो जाती है

इस तरह के गतिरोध को समाप्त करने हेतु राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है यदि उपस्थित एवं मत देने वाले सदस्यों का बहुमत इस संयुक्त बैठक में विधेयक को पारित कर देता है तो उसे दोनों सदनों द्वारा पारित समझा जाता है

5.राष्ट्रपति की स्वीकृति :- संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के स्वीकृति के लिए भेजा जाता है इस समय राष्ट्रपति के समक्ष तीन प्रकार के विकल्प होते हैं

  1. वह विधेयक को स्वीकृति दे सकता है
  2. वह स्वीकृति देने हेतु विधायक को रोक सकता है
  3. वह पुनर्विचार हेतु विधेयक को, सदन को वापस लौट सकता है

यदि राष्ट्रपति विधेयक को स्वीकृति दे देता है तो यह अधिनियम बन जाता है किंतु यदि राष्ट्रपति इसे अस्वीकार कर देता है तो यह निरस्त या समाप्त हो जाता है याद राष्ट्रपति विधेयक को पुनर्विचार ही सदन को वापस भेजता है और सदन संशोधन के या बिना संशोधन किया उसे राष्ट्रपति को दोबारा भेजता है तो राष्ट्रपति इस पर सहमति देते हुए बद्द्य होता है इस प्रकार राष्ट्रपति वास्तव में निलंबरकारी वीटो का ही प्रयोग कर सकता है

 

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