Earthquake In Hindi : भूकंप क्या है, भूकंप आने का कारण, भूकंप के प्रकार पूरी जानकारी

What Is Earthquake : भूकंप एक प्राकृतिक घटना है जिसका साधारण अर्थ पृथ्वी की कंपन होती है, इस घटना के दौरान पृथ्वी के अंदर की एनर्जी बाहर निकालने के कारण तरंगे उत्पन्न होती हैं जो चतुर्थदिश फैल कर पृथ्वी को कम्पित करती हैं, इसी तरंग को भूकंपीय तरंग कहते हैं भूकंपीय तरंगों को मापने के अलग-अलग पैमाने निर्धारित किए गए हैं, तो दोस्तों “Earthquake In Hindi : भूकंप क्या है, भूकंप आने का कारण,प्रभाव, और भूकंप के प्रकार” आर्टिकल के माध्यम से सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें-

Earthquake In Hindi : भूकंप क्या है, भूकंप आने का कारण
Earthquake In Hindi : भूकंप क्या है, भूकंप आने का कारण

Earthquake In Hindi : भूकंप आने का कारण

भूकंप आने के कारण साधारण शब्दों में कहें तो पृथ्वी के अंदर सात प्लेट हैं जो लगातार घूमती रहती हैं जहां यह प्लेटें आपस में टकराती हैं वह बिंदु फॉल्ट लाइन कहा जाता है प्लेटो का आपस में टकराने के कारण अधिक घनत्व वाले प्लेट के कुछ हिस्से नीचे दबते हैं और वही हाई एनर्जी के साथ बाहर आने के रास्ते खोजती हैं,

प्लेटो के आपस में टकराना भूकंप कारण बनती हैं और हाई डेंसिटी वाले प्लेट के कुछ हिस्से नीचे दबने और वही हाई एनर्जी के साथ भूगर्भ की गर्मियों से पिघले हुए चट्टान मैग्मा के रूप में बाहर आने की घटना ज्वालामुखी भूकम्प कहलाती है भूकंप आने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं जैसे

  1. ज्वालामुखी क्रिया
  2. भूपटल भ्रंश ( वलन भ्रांशन )
  3. आंतरिक गैसों का फैलाव
  4. भूसंतुलन में अव्यवस्था
  5. भूपटल में सिकुड़न
  6. प्लेट विवर्तनिकी
  7. मानव जनित कारक

भूकंपीय लहरें :-

जब भूकंप केंद्र से भूकंप शुरू होता है तो इस केंद्र से भूकंपीय लहरें उठने लगते हैं तथा सर्वप्रथम भूकंप अधिक केंद्र पर पहुंचती है भूकंपीय लहरों को तीन भागों में विभाजित किया गया है

(क) प्राथमिक लहरें (P-waves) इन लहरों की औसत गति 8 से 14 किलोमीटर प्रति सेकंड के बीच होती है क्योंकि इसकी गति सबसे अधिक होती है यह सबसे पहले धरातल पर पहुंचती हैं यह तरंगे ध्वनि समान होती हैं तथा यह ठोस, द्रव, गैसीय पदार्थ में यात्रा कर सकती हैं

(ख) अनुप्रस्थ लहरें (S-waves) यह लहरें प्रकाश तरंग के समान होती हैं उनके अणुओ की गति समकोण पर होती है इन्हें द्वितीय लहरें भी कहते हैं क्योंकि यह प्राथमिक लहरों के बाद प्रकट होती हैं यह तरल पदार्थ से नहीं गुजर पाती हैं इसलिए सागरों में यह विलुप्त हो जाती हैं

(ग) धरातलीय लहरें (L-waves) इनका भ्रमण पथ पृथ्वी का धरातलीय भाग ही होता है इनका वेग 3 किलोमीटर प्रति सेकंड होता है, इन्हें लंबी लहरें इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनका भ्रमण समय अधिक होता है तथा यह सर्वाधिक दूरी तय करती हैं

भूकंप के प्रकार :-

  1. ज्वालामुखी भूकंप
  2. विवर्तनिकी भूकंप
  3. फॉल्ट भूकम्प

भूकंप मापी यंत्र :-

  • भूकंप Earthquake का अध्ययन सीस्मोलॉजी कहलाता है वर्तमान में रिक्टर पैमाने पर भूकंप तीव्रता का मापन किया जाता है भूकंप मापी यंत्र सीस्मोग्राफ कहलाता है
  • रिक्टर पैमाने P- वेव के अपवर्तन पर कार्य करता है अथवा अपारदर्शी विवरण होता है। 
  • अधिकतर पैमाना लघु गुड़कीय श्रेणी पर आधारित कार्य करता है परंतु मान निकलते समय एंटीलॉग नहीं लेते हैं दशमलव के बाद सिर्फ एक स्थान तक मान निकाला जाता है जैसे –
  • आज ही (Earthquake today) देर रात में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया की 6.4 की तीव्रता से नेपाल में भूकंप आया,
  • Earthquake Nepal: भूकंप का केंद्र नेपाल था इसी कारण दिल्ली Earthquake Delhi, नोएडा, गाजियाबाद, तक इसकी तीव्रता कम होने के कारण किसी प्रकार का भारतीय जन-धन पर प्रभाव नहीं पड़ा
  • इसके संकेत उत्तर प्रदेश बिहार और राजधानी पटना हरियाणा के साथ और कई स्थानों पर महसूस किए गए

भूकंप मापने के लिए निम्न पैरामीटर प्रयुक्त किए जाते हैं

रिक्टर स्केल :-

  • अधिकतर पैमाने पर परिमाण भूकंप के दौरान उत्पन्न ऊर्जा से संबंधित परिमाण को निरपेक्ष संख्या 0-10 के मध्य निरूपित किया जाता है अधिकतर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता या कंपन के आधार पर मापा जाता है। 
  • रिक्टर स्केल (Richter Scale) का उपयोग भूकम्प (earthquake) की तीव्रता या मात्रक की मापन में किया जाता है। इस स्केल का उपयोग भूकम्प की तीव्रता को संख्याओं में प्रकट करने के लिए किया जाता है, जिससे लोगों को भूकम्प की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है और सहायक सुरक्षा कार्रवाई करने में मदद मिलती है।

रिक्टर स्केल का उपयोग निम्नलिखित कारणों के लिए किया जाता है:

  1. भूकम्प की तीव्रता की मापन: इस स्केल का उपयोग भूकम्प की तीव्रता को मापने में किया जाता है, जिससे भूकम्प की ज्यादा सटीक जानकारी प्राप्त होती है।
  2. भूकम्प की तुलना: रिक्टर स्केल की मदद से भूकम्प की तीव्रता को अलग-अलग स्थानों पर हुई भूकम्पों के बीच तुलना की जा सकती है, जिससे यह निर्धारित किया जा सकता है कि किस स्थान पर भूकम्प का प्रभाव ज्यादा था।
  3. सुरक्षा कार्रवाई: रिक्टर स्केल का उपयोग सुरक्षा कार्रवाई की योजना बनाने और भूकम्प के प्रभाव को समझने में मदद करता है, ताकि समुद्र तटों, नगरों, और अन्य स्थलों में लोगों की सुरक्षा की जा सके।

मर्केली स्केल :-

  • भूकंप मापी मर्केली स्केल का नाम इटली के भू-वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है भूकंप की तीव्रता का मापन घटना के दौरान होने वाली क्षति दृश्य को ध्यान में रखकर तीव्रता पैमाने की सीमा 1-12 डेसी सूक्ष्म स्तर रखा गया है।
  •  मर्केली स्केल का उपयोग भूकंप के प्रभाव को मापने और विश्लेषण के लिए किया जाता है, विशेष रूप से भूकंप के प्रभाव को लोगों और जगहों पर कैसे महसूस किया गया है। इस स्केल का उपयोग भूकंप की तीव्रता के बजाय उसके प्रभाव को जांचने में किया जाता है।
  • मार्केली स्केल के आधार पर, एक भूकंप के प्रभाव को विभिन्न स्तरों पर वर्गीकृत किया जाता है, जैसे कि “I” स्तर एक अत्यंत कम मात्रा में प्रभाव को दर्शाता है, जबकि “XII” स्तर एक अधिकतम प्रभाव को दर्शाता है। इसका उपयोग भूकंप के प्रभाव को अधिक सटीकता के साथ मापने और तीव्रता की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जो भूकंप के बाद किसी क्षेत्र में हुआ था।
  • मार्केली स्केल के स्थानीय लोगों और विज्ञानिकों के लिए भूकंप के प्रभाव की ज्यादा सही जानकारी प्रदान करने में मदद करता है और सहायक सुरक्षा कार्रवाई करने के लिए महत्वपूर्ण होता है।

राकी स्केल :-

  • यह स्केल भूकंप की तीव्रता को संख्याओं में प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और यह विश्वासी तरीके से भूकंप की मात्रक तीव्रता को प्रकट करने में मदद करता है।
  • राकी स्केल का उपयोग भूकंप की मृदुता से लेकर अत्यधिक तीव्रता तक के भूकंपों को मापने में किया जाता है। इस स्केल पर दर्ज की गई संख्या उस भूकंप की तीव्रता को प्रकट करती है, जिससे सामान्य लोगों को भूकंप की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है और सहायक सुरक्षा कार्रवाई करने में मदद मिलती है।

विश्व के भूकंप प्रभावित क्षेत्र :- 

विश्व भूकंप का विवरण प्लेटो के सीमंतो पर ही है वैश्विक भू-भाग कुल सात बड़ी प्लेट पर स्थित है –

  1. आर्कटिक प्लेट –
  2. उत्तरी-अफ्रीकन प्लेट –
  3. दक्षिणी अफ्रीकन प्लेट –
  4. महाद्वीपीय महासागरीय प्लेट –
  5. यूरेशियन प्लेट –
  6. ऑस्ट्रेलियन प्लेट
  7. इंडो ऑस्ट्रेलियन प्लेट

ये भी पढ़ें :- ग्रहों के नाम हिन्दी और अंग्रेजी में 

भूकंप के प्रभाव :- 

  • Earthquake के दौरान प्राइमरी वेब,  सेकेंडरी वेब और लॉन्ग वेब भूकंप केंद्र पर निर्भर करता है कि कौन सा क्षेत्र किस तरंग से प्रभावित होगा ।
  • भूकंप के झटके महसूस करते-करते बड़ी-बड़ी बिल्डिंग धराशाई हो जाती हैं कुछ ही सेकंड या नैनो सेकंड की बात होती है जब तक इंसान भूकंप को समझ पाता है तब तक सब कुछ तहस-नहस हो चुका होता है।

भूस्खलन :- 

भूस्खलन से तात्पर छोटे-बड़े चट्टानों का अपनी सात से भूमि के आंतरिक हलचलों के कारण फिसलना ही भूस्खलन कहलाता है भूस्खलन जैसी घटनाएं अधिकतर पहाड़ी क्षेत्रों में घटित होती हैं पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानों का फिसलना प्राकृतिक घटनाओं के अलावा कुछ मानवीय कारण भी शामिल होते हैं जिस कारण से भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न होती है ।

हिमस्खलन :- 

हिमस्खलन की घटना किसी भी ढलान वाली सतह पर तेजी से बर्फीली चट्टान का फिसल जाना हिमस्खलन कहलाता है प्राकृतिक कारणों से होता है हिमस्खलन या बर्फीली तूफ़ान को एबलांचे कहते हैं।

बाढ़ और सुनामी :- 

  • बड़ी-बड़ी बांधों का भूकंप के प्रभाव से टूटने से बाढ़ की संभावना बढ़ जाती है जिस कारण से लैंडस्लाइड के कारण बड़ी चट्टानों के फिसलन से बांध का टूटना और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना Earthquake का ही परिणाम है
  • सुनामी एक प्राकृतिक घटना है इसके दौरान समुद्र के भीतर Earthquake के कारण भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न होने पर सुनामी की संभावना रहती है।

आग और खतरनाक रसायन :-

भूकंप के कारण से ही आग जनित की घटना हो सकती है तीव्र Earthquake के कारण गैस पाइपलाइन के टूटने की संभावना बढ़ जाती है। 

Earthquake के कारण ही औद्योगिक क्षेत्र में खतरनाक रसायनों के रिसने की घटना घटित हो सकती है जो कि पर्यावरण के असंतुलन की स्थिति उत्पन्न करती है।

भूकंप के दौरान सावधानियां (Earthquake Safety Information) :-

  • Earthquake के झटके महसूस होते ही तुरंत कुछ निम्नलिखित सावधानियां का पालन करते हैं तो कुछ हद तक अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं घर के अंदर
  • घर के अंदर ही जब तक भूकंप के झटके महसूस होते हैं तब तक आप घर के अंदर ही कमरे के कॉर्नर या कॉर्नर से लगे मेज के नीचे अपने सिर को छुपा कर रखें।
  • यदि आप घर से बाहर है तो भूकंप के झटके महसूस होने पर आप अपने आसपास बिजली लाइन और बड़ी इमारत के पास पड़ोस में ना रुके। 
  • यदि आप नेशनल हाईवे के आसपास है तो गाड़ी को रोक कर हाईवे से दूरी बना ले क्योंकि भूकंप के झटके के दौरान गाड़ियां अनियंत्रित हो जाती है।

भूकम्प के विषय में और विस्तृत जानकारी के लिए :- क्लिक करें 

 

FAQ’S 

प्रश्न:- भूकंप आने का मुख्य कारण क्या है?

भूकंप की स्थिति उत्पन्न होने का महत्वपूर्ण कारण जब दो प्लेट आपस में टकराती हैं तो भूकंप की स्थिति उत्पन्न हो होती है जिसका परिणाम तरंगे विश्रित होती हैं साधारण शब्दों में कहे तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं भूकंप के कुछ और विशेष कारण है जैसे ज्वालामुखी विस्फोट, भूमिगत विस्फोट, मानव निर्मित गतिविधियां अथवा प्रेरित भूकंप इत्यादि ।

प्रश्न:- भूकंप मापने का यंत्र का नाम क्या है?

भूकंप की तीव्रता का पता लगाने के लिए सीस्मोग्राफ का इस्तेमाल किया जाता है हालांकि भूकंप मापी यंत्र की बात करें तो कुछ निम्नलिखित पैमाने निर्धारित किए जाते हैं जैसे रिक्टर पैमाना, फुजिटा स्केल, राकी स्केल, मर्केली स्केल इनमें से रिक्टर स्केल वर्तमान में प्रचलन में है। 

प्रश्न:- भूकंप का मूल केंद्र क्या कहलाता है?

भूकंप का मूल केंद्र फॉक्स (Focus) वह स्थान होता है जहां पर भूकंप की उत्पत्ति होती है।

प्रश्न:- भूकंप से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

भूकंप महसूस होने पर यदि आप उस स्थिति में घर से बाहर है तो अपने आसपास बिल्डिंग, पेड़, स्ट्रीट लाइट अथवा बिजली टेलीफोन आदि के तारों से दूर रहे इसके अलावा

यदि आप अपने घर में हैं तो भूकंप के झटके महसूस होने पर आप अपने घर के किसी कमरे के कॉर्नर अथवा हल्के टेबल या ऐसे किसी कॉर्नर के पास छिपे जिससे कि आपका शरीर सुरक्षित बच पाए। 

4 thoughts on “Earthquake In Hindi : भूकंप क्या है, भूकंप आने का कारण, भूकंप के प्रकार पूरी जानकारी”

Leave a Comment