Ecosystem in Hindi: पारिस्थितिकी तंत्र क्या है पूरी जानकारी

पारिस्थितिकी तंत्र को सर्वप्रथम परिभाषित करने एवं विस्तृत अध्ययन करने का श्रेय जर्मन जीव वैज्ञानिक अर्नेस्ट हैकल को प्राप्त है Ecosystem के अंतर्गत जीवधारी के वास स्थान एवं उन पर पड़ने वाले वातावरण के प्रभाव का अध्ययन किया जाता है औद्योगिक मानव की क्रिया का प्रभाव प्राकृतिक पर्यावरण के साथ-साथ मानव पर भी पड़ रहा है परिणाम स्वरूप पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न घटक दुष्प्रभावित हुए हैं Ecosystem in Hindi के अंतर्गत पोषण स्तर, ऊर्जा प्रवाह, खाद्य-श्रृंखला एवं बायोम का अध्ययन किया जाता है |

Ecosystem in Hindi: पारिस्थितिकी तंत्र क्या है पूरी जानकारी
Ecosystem in Hindi: पारिस्थितिकी तंत्र क्या है पूरी जानकारी

What Is Ecosystem (In Hindi) पारिस्थितिकी तंत्र क्या है

पारिस्थितिकी सर्वप्रथम 1969 ई में अर्नेस्ट हैकल जंतु वैज्ञानिक ने पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग किया था वातावरण और जीव समुदाय के पारस्परिक संबंधों के अध्ययन को पारिस्थितिकी (Ecosystem) कहते हैं |

पारिस्थितिकी तंत्र (Define Ecosystem)

1935 ईस्वी में आग ट्रांसलेशन में सर्वप्रथम पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का प्रयोग किया था पारिस्थितिकी तंत्र एक क्रियाशील इकाई होता है जिसमें परस्पर क्रिया करने वाले जीवधारी तथा किसी भी क्षेत्र के वातावरण के समस्त पक्ष सम्मिलित होते हैं पारिस्थितिकी तंत्र एक खुला तंत्र होता है

पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख कारक :-

पारिस्थितिकी तंत्र के कारकों को चार श्रेणियां में विभाजित किया गया है

  1. जलवायवीय कारक :- प्रकाश तापमान वर्षा आद्रता
  2. स्थलाकृतिक कारक :- ऊंचाई पर्वत की दशाएं ढाल की तीव्रता
  3. मृदा उत्पादक कारक :- मृदा की भौतिक रासायनिक एवं जैविक विशेषताएं
  4. जैविक कारक :- समस्त पौधे पशु सूक्ष्मजीव और उनके मध्य होने वाले परस्पर अतः क्रियाएं 

पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार : Types of Ecosystem (in Hindi)

पारिस्थितिकी तंत्र को दो निम्नलिखित प्रकार में विभाजित किया गया है

  1. मानव अभियांत्रिकी पारिस्थितिकी तंत्र :-मानवीय गतिविधियों से निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र को मानव अभियांत्रिकी पारिस्थितिकी तंत्र या कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं जैसे- खेत का पारिस्थितिकी तंत्र ,नगरीय पारिस्थितिकी तंत्र आदि
  2. प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र :- यह प्राकृतिक रूप से संचालित होते हैं जैसे-वन, घास, मरुस्थलीय, झील, समुद्र  इत्यादि

पारिस्थितिकी तंत्र के घटकों का वर्णन (Function of Ecosystem) :-

(क) जैविक घटक –

जैविक घटक के अंतर्गत निम्नलिखित घटकों को शामिल कर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है

  • उत्पादक :- वह घटक जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं जैसे :- हरे, पेड़-पौधे
  • उपभोक्ता :- इसके अंतर्गत वह जीवधारी आते हैं जो अपना भोजन प्राथमिक उत्पादकों- हरे-पौधों अथवा अन्य जीवधारी से प्राप्त करते हैं उपभोक्ता की तीन श्रेणियां हैं-

  • a. प्राथमिक उपभोक्ता :- इसके अंतर्गत वह जीवधारी आते हैं जो हर पौधों या उनके किसी भाग को खातें हैं जैसे :- गाय, भैंस, बकरी, और हिरन आदि
  • b. द्वितीय उपभोक्ता :- इसके अंतर्गत वह जीवधारी आते हैं जो प्राथमिक उपभोक्ताओं को अपने भोजन के रूप में प्रयुक्त करते हैं जैसे :- लोमड़ी, भेड़िया, मेंढक आदि
  • c. तृतीयक उपभोक्ता :- इसके अंतर्गत वह जीवधारी आते हैं जो द्वितीय उपभोक्ताओं को खाकर जीवित रहते हैं जैसे :- बाघ, शेर आदि
  • अपघटक  :- अपघटक मृत उत्पादक एवं उपभोक्ताओं का अपघटन कर उन्हें अजैविक घटकों में परिवर्तित कर देते हैं इस वर्ग में मुख्यतः कवक एवं जीवाणु आते हैं |
  • अपघटक मृत पौधों एवं जंतुओं का अपघटन कर उन्हें साफ करते रहते हैं इसलिए उन्हें प्राकृति या मेहतर भी कहते हैं

पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य श्रृंखला :-

किसी विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत विभिन्न जीवधारी के मध्य के संबंधों के सुनिश्चित क्रम को खाद्य श्रृंखला कहते हैं

इनमें प्रत्येक जीवधारी श्रृंखला में अपने से नीचे क्रम के सदस्य पर भोजन के लिए निर्भर करता है [उदाहरण- पेड़-पौधे- हिरण- शेर- अपघटक]

विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य श्रृंखला :-

तालाब :-

उत्पादक फाइटोप्लैंक्टन या प्लवक (शैवाल वोलबॉक्स डायटम) जलीय हरे पौधे –

  1. प्राथमिक उपभोक्ता :- जलीय पिस्सू
  2. द्वितीयक उपभोक्ता :- छोटी मछली
  3. तृतीयक उपभोक्ता :- बड़ी मछली

घास :-

  • उत्पादक :- घास 
  1. प्राथमिक उपभोक्ता कीड़े मकोड़े आदित्य
  2. द्वितीय उपभोक्ता मेंढक चिड़िया आदि
  3. तृतीयक उपभोक्ता सांप बाज आदि

वन :-

  • उत्पादक :- छोटे पौधे शाक एवं झाड़ियां तथा वृक्ष
  1. प्राथमिक प्राथमिक उपभोक्ता खरगोश हिरण गिलहरी बंदर लंगूर आदि
  2. द्वितीयक उपभोक्ता सांप छिपकली लोमड़ी बिल्ली आदि
  3. तृतीयक उपभोक्ता शेर चीता आदि
  • ध्यातव्य है कि स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र वन का होता है
  • पृथ्वी का सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र समुद्र या महासागरों का होता है
  • सर्वाधिक स्थाई पारिस्थितिकी तंत्र समुद्र का होता है

पारिस्थितिकी पिरामिड :- 

  • पारिस्थितिकी पिरामिड का विचार सर्वप्रथम चार्ल्स एल्टन ने 1927 ईस्वी में दिया था
  • किसी परिस्थिति की तंत्र में उत्पादकों एवं विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं की संख्या जीवभार एवं संचित ऊर्जा के संबंध की चित्रात्मक संरचना पिरामिड के समान प्रतीत होती है इसे ही पारिस्थितिकी पिरामिड कहते हैं |
Ecosystem in Hindi: पारिस्थितिकी तंत्र क्या है पूरी जानकारी
Ecosystem in Hindi: पारिस्थितिकी तंत्र क्या है पूरी जानकारी

तृतीयक उपभोक्ता – द्वितीयक उपभोक्ता – प्राथमिक उपभोक्ता – उत्पादक

  • पारिस्थितिकी से सम्बंधित :- Wikipedia Link

पारिस्थितिकी पिरामिड तीन प्रकार के होते हैं

  1. संख्यात्मक पिरामिड
  2. जीव भार पिरामिड
  3. ऊर्जा पिरामिड

1. संख्यात्मक पिरामिड

  • इस पिरामिड से पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादकों तथा विभिन्न श्रेणी की उपभोक्ताओं की संख्या के संबंध के बारे में बोध होता है
  • इस प्रकार के पिरामिड सीधे तथा उल्टे दोनों प्रकार के हो सकते हैं उदाहरण-

a. घास स्थलीय एवं फसल स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संख्यात्मक पिरामिड सीधे बनते हैं

  • क्योंकि घास एवं फसल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्राथमिक उत्पादकों की संख्या सबसे अधिक होगी जबकि विभिन्न श्रेणी के ऊपर उपभोक्ताओं की संख्या क्रमशः घटती जाएगी

b. एक पेड़ की पारिस्थितिकी तंत्र एवं संख्यात्मक पिरामिड उल्टा बनता है

  • क्योंकि एक पेड़ के पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पादक की संख्या एक है, जबकि इसके उपभोक्ताओं की संख्या क्रमशः बढ़ती जाती है

2. जीवभार पिरामिड (Pyramid of Biomass)

  • इस पिरामिड से पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादकों तथा विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के भार के संबंध के बारे में बोध होता है |
  • जी भर पिरामिड भी उल्टे एवं सीधे दोनों हो सकते हैं जैसे-

a. वन एंव घास स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के पिरामिड सीधे बनेंगे

  • क्योंकि दोनों तंत्रों के प्राथमिक उत्पादकों का भार विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के भार से अधिक होता है

b. तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र का जीव हर पिरामिड उल्टा बनेगा

  • क्योंकि इसमें प्राथमिक उत्पादकों की संख्या अधिक होते हुए भी भार कम होता है जबकि उच्च मांसाहारी बड़ी मछलियां जंतुओं की संख्या कम होते ही भार अधिक होता है |

3. ऊर्जा का पिरामिड :-

  • यह पिरामिड पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न पोषण स्तरों के जीवधारियों द्वारा प्रयोग में लाई गई कुल संचित ऊर्जा का बोध कराता है |
  • यह पिरामिड सदैव सीधे बनते हैं क्योंकि खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक पोषण स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का प्रत्येक अनुवर्ती क्रम में ह्रास होता है
  • प्रत्येक पोषण स्तर के जीवधारी केवल 10% ऊर्जा का ही स्थानांतरण अगले पोषण स्तर पर करते हैं |

 

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