Environment Day Poster: पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक निबंधात्मक

आदम अवस्था से मानव पूर्ण रूप से पर्यावरण पर निर्भर था आज भी उसकी निर्भरता पर्यावरण पर बनी हुई है 23वीं सदी में भौतिकवादी सभ्यता के विकास की सदी मानी जा सकती है इस सदी में मानव ने अपनी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अवाद्ध दोहन किया है प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित विदोहन से न केवल प्राकृतिक संपदाओं का ह्रास हुआ है बल्कि पर्यावरण की भारी क्षति हुई है इस कारण वर्तमान युग में भूमंडलीय तापन जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत क्षरण, जैव-विविधता की हानि जैसे पर्यावरण समस्याएं उत्पन्न हुई हैं, Environment Day Poster: पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक निबंधात्मक (Essay on environment) वर्णन किया गया है |

Environment Day Poster: पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक निबंधात्मक
Environment Day Poster: पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक निबंधात्मक

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Environment Day Poster: पर्यावरण का अर्थ परिभाषा :-

Environment Meaning : पर्यावरण (Environment) दो शब्दों परि+आवरण से मिलकर बना है परि का अर्थ होता है “चारों ओर” और आवरण का शाब्दिक अर्थ होता है “घेरा” इस प्रकार प्रकृति का हमारे चारों ओर घेरा ही पर्यावरण है इसके अंतर्गत आने वाले पादप, प्राणी, मृदा, जल एंव वायु आदि पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं मानव का पर्यावरण से संबंध उतना ही पुराना है जितना, मानव की उत्पत्ति

  1. What is environment : “पर्यावरण से तात्पर हमारे चारों ओर के वातावरण से है”
  2. समस्त जैविक (मनुष्य, सभी जीव जंतु, पौधे, सूक्ष्म जीव) तथा अजैविक (जल, स्थल, वायु) घटक पर्यावरण में सम्मिलित होते हैं
  3. इस प्रकार पर्यावरण एक अनिवार्य समष्टि है तथा भौतिक जैविक एवं संस्कृति तत्वों वाले पारस्परिक क्रियाशील तंत्रों से इसकी रचना होती है
  4. पर्यावरण को सामान्य तौर पर प्रकृति भी कहा जाता है

World Environment Day विश्व पर्यावरण दिवस:-  

  • विश्व पर्यावरण दिवस की थीम 2022- Only One Earth ‘केवल एक पृथ्वी’ 
  • विश्व पर्यावरण दिवस की थीम 2023- Solutions to Plastic Pollutionप्लास्टिक प्रदूषण का समाधान”   प्रकृति को प्लास्‍टिक मुक्त बनाना और पर्यावरण को बचाना है।
  • विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक 5 जून को मनाया जाता है (5 June environment day)
  • पहली बार 1973 इस्वी में पर्यावरण दिवस मनाया गया था 
 

पर्यावरण के प्रकार

पर्यावरण के निम्नलिखित तीन प्रकार बताए गए हैं

स्थलमंडल

जलमंडल

वायुमंडल

स्थलमंडल :- स्थलमंडल से आशय पृथ्वी की ऊपरी परत से है जिसमें मिट्टी, रेत, पत्थर तथा विभिन्न प्रकार के खनिज पाए जाते हैं।

जलमंडल :- पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जल स्त्रोत- नदी, तालाब, झील, समुद्र आदि जलमंडल कहलाते हैं

  • पृथ्वी के लगभग तीन चौथाई 71% भाग जल अक्षादित है
  • जलमंडल का सबसे बड़ा भाग सामुद्रिक तंत्र के रूप में विद्यमान है

वायुमंडल :- पृथ्वी की सतह के ऊपरी भाग पर हवा की विस्तृत भंडार वायुमंडल कहते हैं

  • वायुमंडल अनेक गैसों का मिश्रण है
  • नाइट्रोजन 78% वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है
  • नाइट्रोजन के बाद कम से ऑक्सीजन 21% आर्गन 0.93% कार्बन डाइऑक्साइड 0.03%, हीलियम, ओजोन तथा हाइड्रोजन आदि गैस वायुमंडल में पाई जाती हैं
  • जलवाष्प धूल के कण तथा अन्य अशुद्धियां भी आसमान मात्रा में वायुमंडल में उपस्थित रहते हैं
  • वायुमंडल के प्रति इकाई आयतन में जलवाष्प की मात्रा 0 से 4% तक होती है
  • रेडान एक मात्र अक्रिय गैस है जो वायुमंडल में नहीं पाई जाती है

वायुमंडल की संरचना

  • वायुमंडल का विस्तार लगभग 1000 किलोमीटर की ऊंचाई तक है ।
  • वायुमंडल का 99% भर सिर्फ 32 किलोमीटर की ऊंचाई तक है इसे 5 सन स्टार्स में बांटा जाता है

क्षोभमंडल :-

ध्रुव पर 8 किलोमीटर तथा विषुवत रेखा पर 18 किलोमीटर की ऊंचाई तक ।

  • क्षोभमंडल में प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान घटता है
  • इस मंडल में प्रति किलोमीटर की ऊंचाई पर तापमान में औसतन 6.5 डिग्री सेल्सियस की कमी आती है इसे ही सामान्य ताप ह्रास दर कहते हैं
  • वायुमंडल में होने वाली समस्त मौसमी गतिविधियां क्षोभमंडल में पायी जाती हैं

समतापमंडल :-

20 किलोमीटर से 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक समताप मंडल का विस्तार होता है 

  • समतापमंडल में तापमान लगभग स्थिर रहता है
  • इस मंडल में ओजोन परत पाई जाती है जो कि सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है
  • यह मंडल मौसमी हलचलों से मुक्त होता है इसलिए वायुयान चालक यहां विमान उड़ाना पसंद करते हैं

मध्यमंडल :-

  • 50 से 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक
  • समतापमंडल के बाद 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक मध्य मंडल का विस्तार है
  • इस मंडल में ऊंचाई के साथ ताप में उत्तरोत्तर कमी आती है

आयनमंडल :-

80 किलोमीटर से 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक

  • आयनमंडल में विद्युत आवेशित कणों की प्रधानता होती है एवं ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ने लगता है
  • वायुमंडल की इसी परत में विभिन्न आवृत्तियों की रेडियो तरंगे परिवर्तित होती हैं
  • यह मंडल D,E तथा F की परतों में बांटा हुआ है
  • इस मंडल में ध्रुवीय प्रकाश उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश और दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश के रूप में मिलता है

बहिरमंडल :-

400 से 1000 किलोमीटर तक

  • 640 किलोमीटर से लेकर 1000 किलोमीटर की ऊंचाई तक बहिरमंडल का विस्तार है
  • यहां पर नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम की अलग-अलग परत होती है
  • इस मंडल में 10000 किलोमीटर की ऊंचाई के बाद वायुमंडल अत्यंत विरल हो जाता है

पर्यावरण के संघटक (Define environment) :-

पर्यावरण के तीन संघटक हैं

  • भौतिक या अजैविक :-  संघटक स्थल वायु जल
  • जैविक संघटक :- पादप, मनुष्य समेत जीव, जंतु, सूक्ष्म जीव
  • ऊर्जा संगठक :- सूर्य, भूतापीय ऊर्जा

मानव-पर्यावरण का संबंध

मनुष्य पर्यावरण संबंध को तीन अवस्था में बांटा जा सकता है

आदिमानव के रूप में :-

  • यह मानव विकास का शैशवावस्था थी
  • आदिमानव की भूमिका प्राप्तकर्ता और पारदाता दोनों की रही है
  • अर्थात यदि आदिमानव पर्यावरण से फल, फूल, मांस आदि लेता था तो वह अनजाने में वनस्पतियों के बीजों को दूर दराज के स्थान तक बिखर कर वनस्पति विकास की प्रक्रिया का संवर्धन भी करता था
  • इस प्रकार आदिमानव प्राकृतिक पर्यावरण का अभिन्न अंग था

सभ्य मानव के रूप में :-

  • आदिमानव अग्नि की खोज, कृषि का ज्ञान, पशुपालन और पहिए का आविष्कार आदि के विकास से सभ्य मानव कहलाने लगा।
  • सभ्यमानव यदि अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता था परंतु इससे पर्यावरण को कोई विशेष क्षति नहीं होती थी।
  • इस अवस्था तक मानव और पर्यावरण में सहभागिता और  परस्पर स्वावलंबन का संबंध था।

प्रौद्योगिकी मानव के रूप में :- 

  • 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उच्च तकनीकी विकास के साथ बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण की प्रक्रिया का शुभारंभ हुआ।
  • बड़े पैमाने का औद्योगीकरण से प्रौद्योगिकी मानव ने प्राकृतिक संसाधनों का अभिव्यक्त पूर्ण अबाद्ध दोहन प्रारंभ किया।
  • प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन से अनेक पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न हुई।
  • इस अवस्था में प्रौद्योगिकी मानव का आर्थिक मानव के रूप में कायाकल्प हुआ।
  • थ्यातव्य है कि 19वीं शताब्दी में के पूर्वार्ध तक प्रौद्योगिकी मानव पर्यावरण का विनाशक नहीं था।
  • यातायात के लिए, सड़क सिंचाई के लिए, नहरी ग्यान अर्जन के लिए,  विद्यालय रोग निवारण के लिए, और डाकघर यातायात के साधन आदि के रूप द्वारा प्रौद्योगिकी मानव ने एक अच्छे सांस्कृतिक पर्यावरण का विकास किया
  • प्रौद्योगिकी मानव के इन क्रियाकलापों से पर्यावरण का सीमित दोहन हुआ जो कि पर्यावरण के लिए विनाशकारी नहीं था
Environment Day Poster: पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक निबंधात्मक
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पर्यावरण पर मानव क्रियाकलापों का प्रभाव

क्रियाकलापों के विपरीत प्रभाव को दो वर्गों में बांटा जाता है

(क) प्रत्यक्ष प्रभाव

भूमि उपयोग :-

कृषि क्षेत्र में विस्तार, शहरीकरण, नगरीकरण आदि के कारण बड़े पैमाने पर वनों एवं वनस्पतियों के ह्रास से पर्यावरण असंतुलित होता है

मृदा उत्खनन, खनिज-उत्खनन एवं निर्माण कार्य :-

  • ईंट बनाने के लिए ऊपरी परत खोदने से मृदा का उपजाऊ अंश निकल जाता है
  • खनिज पदार्थों को अनियंत्रित उत्खनन से उस क्षेत्र की वृक्ष, वनस्पतियां नष्ट हो जाते हैं
  • नगरीकरण के कारण बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य सौर विकरण का अवशोषण कर वैश्विक ताप वृद्धि का कारण बनते हैं

मौसम रूपांतरण कार्यक्रम (मेंघबीजन उपलवृष्टि निवारण तथा बादलों और कुहरों का विसरण)

  • मेघवीजन :-  मेघवीजन एक कृत्रिम रितु वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य वर्षण को प्रेरित करना होता है
  • इस प्रक्रिया के अंतर्गत ठोस कार्बन डाइऑक्साइड तथा आयोडीन के रूप में योगिक के प्रयोग द्वारा अति शीतलित बूंद का घनी.. करना सम्मिलित होता है
  • बादलों तथा करों का मिश्रण :- हवाई अड्डे पर निम्न ऊंचाइयों के ऊपर खराब दृश्यता के लिए उत्तरदाई बादलें या कोहरा के कई देशों द्वारा कृत्रिम तरीके से वृष्टि कराया जाता है
  • उप्पल वृष्टि निवारण :- उप्पल वृष्टि निवारण तकनीक द्वारा प्रभावित क्षेत्र की खड़ी फसल बचाने का प्रयास किया जाता है। 
  • उपरोक्त प्रक्रियाओं में एक वीजन उपलवृष्टि निवारण तथा बादलों एवं करों का विसरण में अत्यधिक ऊष्मा ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है
  • यह ऊर्जा बाद में निरुक्त होकर निकले वायुमंडल को गर्म करती है फल स्वरुप वायुमंडल के ऊष्मा संतुलन में बंधा पहुंचती है
  • जल एवं तेल निष्कासन :- भूमिगत जल के अनियंत्रित दोहन से धरती की सतह के नीचे ब्रदर कर कोटा बन जाता है परिणाम स्वरुप धरती की ऊपरी सतह धंस जाती है
  • बांधों एवं जल भंडारों का निर्माण :- नदियों पर निर्मित बांधों के पीछे एकत्रित विशाल जल राशि के भराव के कारण उत्पन एंव द्रव स्थिति की दबाव नीचे स्थित सैलों को सूचित अवस्थित कर देता है
  • इस कारण भूकंपीय घटनाओं की तीव्रता में वृद्धि होती है

(ख) अप्रत्यक्ष प्रभाव

  • अप्रत्यक्ष शीघ्र प्रलक्षित नहीं होते हैं क्योंकि इनका पश्च प्रभाव अत्यंत मंद गति से होता है
  • उदाहरण स्वरूप कीटनाशक रासायनिक दवा तथा रासायनिक उर्वरकों आदि के प्रयोग से जहरीले तत्व खाद्य श्रृंखला द्वारा मनुष्य समेत जीव जंतुओं को प्रभावित करते हैं
  • इस संबंध में डीडीटी सबसे अधिक जहरीला तत्व है

पर्यावरण पर आर्थिक विकास के प्रभाव :- 

पर्यावरण पर आर्थिक विकास के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं

  • ओजोन परत का नष्ट होना
  • प्राकृतिक आवासों का परिवर्तन
  • जैव-विविधता का ह्रास 
  • जल प्रदूषण,  वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण आदि
  • शैवालों पर हानिकारक प्रभाव
  • धूम्र कोहरे की समस्या
  • प्राकृतिक संसाधनों का विनाश
  • भूमंडलीय तपन
  • जलवायु परिवर्तन इत्यादि

यह भी पढ़ें :-

  1. पर्यावरण प्रदूषण
  2. हरितगृह प्रभाव एवं जलवायु परिवर्तन :-
  3. पारिस्थितिकी तंत्र क्या है 
  4. चट्टान किसे कहते हैं चट्टान के प्रकार :-
  5. ओजोन परत क्या है :-
  6. पवन क्या हैं पवन के प्रकार :-
  7. ग्रहों से सम्बंधित तथ्य :-
  8. भारत में वनों के प्रकार
  9. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम
  10. जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय:-
  11. विकिपीडिया लिंक

14 thoughts on “Environment Day Poster: पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक निबंधात्मक”

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