Environmental Pollution Essay In Hindi: पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

Environmental Pollution Essay In Hindi: पर्यावरण प्रदूषण वर्तमान युग की वैश्विक समस्या है प्रदूषण वायु, जल एवं स्थल का भौतिक, रासायनिक विशेषताओं में होने वाला वह अवांछित परिवर्तन है जिससे मानव और उसके लिए लाभदायक सूक्ष्म जीव-जंतु और वनस्पतियों को हानि पहुंचती है मनुष्य की उपभोक्तावादी प्रवृत्ति ने प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित विदोहन किया है परिणाम स्वरुप जल, स्थल एवं वायु आदि सभी प्रदूषित हुए पर्यावरण प्रदूषण से मनुष्य समेत जीव-जंतु तथा पेड़-पौधे सभी दुष्प्रभावित हुए Environmental Pollution Essay In Hindi: पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Long Essay on Environmental Pollution in Hindi, environmental pollution project class 11, environmental pollution project class 12 Paryavaran Pradushan par Nibandh Hindi mein

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Environmental Pollution Essay In Hindi: पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध
Environmental Pollution Essay In Hindi: पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

Environmental Pollution Essay In Hindi: पर्यावरण प्रदूषण :-

  • पर्यावरण के भौतिक रासायनिक एवं जैविक लक्षणों में अवांछित परिवर्तन को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं

प्रदूषण के दो प्रकार हैं

  1. प्राकृतिक प्रदूषण :- प्राकृतिक कारण से उत्पन्न प्रदूषण को प्राकृतिक प्रदूषण कहते हैं जैसे ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन, बाढ़-सूखा तथा धान की खेती है जानवरों की जुगाली द्वारा मिथेन गैस का निर्माण आदि
  2. मानव जनित प्रदूषण :- मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न प्रदूषण को मानव जनित प्रदूषण कहते हैं जैसे खनन कार्य वनोनल वनोन्मूलन सीवेज औद्योगिक अपशिष्ट आदि

प्रदूषक :-

  • प्रदूषण प्रदूषण उत्पन्न करने वाले कारकों को प्रदूषण कहते हैं प्रदूषण के दो भेद हैं
  1. अपघटनीय प्रदूषक (Biodegradable Pollutants) वे पदार्थ जो सूक्ष्म जीवों द्वारा अपना विषाक्त प्रभाव खो देते हैं अब घटना प्रदूषण कहलाते हैं जैसे वाहितमल, जैवीय अपशिष्ट पदार्थ एवं कूड़ा करकटा आदि
  2. अनपघटनीय प्रदूषक ऐसे पदार्थ जो सूक्ष्म जीवो द्वारा आपघटित नहीं हो पाते अनपघटनीय प्रदूषण कहलाते हैं जैसे सीसा, पारा, आर्सेनिक, कैडमियम, निकेल, डीडीटी आदि

प्रदूषण के कारण :-

  1. वनों का क्षरण
  2. जनसंख्या वृद्धि
  3. शहरीकरण
  4. औद्योगिकरण
  5. रासायनिक करो का कीटनाशकों का बढ़ावा बढ़ता प्रयोग
  6. यातायात
  7. युद्ध
  8. पशु आदि

प्रदूषण के प्रकार (Types of Environmental Pollution) :-

  • पर्यावरण प्रदूषण को निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है
  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. ध्वनि प्रदूषण
  4. मृदा प्रदूषण
  5. रेडियोधर्मी प्रदूषण
  6. प्लास्टिक प्रदूषण

वायु प्रदूषण (Air Pollution) :-

  • जब मानवीय अथवा प्राकृतिक कारणो से गैसों की निश्चित मात्रा एवं अनुपात में अवांछनीय परिवर्तन हो जाता है या वायु में इन गैसों के अतिरिक्त कुछ अन्य विषाक्त गैसे या कणिकीय पदार्थ मिल जाते हैं तो इसे वायु प्रदूषण कहते हैं

वायु प्रदूषण के दो स्रोत हैं

  1. प्राकृतिक स्रोत जैसे :– ज्वालामुखी विस्फोट, वनाग्नि आदि
  2. मानव जनित स्तोत्र :– लकड़ी कोयला तथा पेट्रोल का दहन औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली विभिन्न प्रकार की विषैली गैसे आदि
  • विभिन्न स्रोतों से निकलने वाली विषैली गैस है
  • वनअग्नि कार्बन-मोनोऑक्साइड, कार्बन-डाइऑक्साइड राख के कण आदि
  • ज्वालामुखी उद्गार, सल्फर-डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन-सल्फाइड आदि
  • पेड़ पौधों की दैहिक क्रियाएं-अमोनिया नाइट्रोजन के ऑक्साइड मेथेन एंव कार्बन डाइऑक्साइड आदि
  • जीवाश्म ईंधन खनिज तेल कोयला का दहन कार्बन डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड
  • जीवाश्म इंधनों का अपूर्ण दहन हाइड्रोकार्बन
  • एरोसेल कैन तथा रेफ्रिजरेशन प्रणाली क्लोरोकार्बन
  • गंधक युक्त जीवाश्म इंधनों का दहन सल्फर डाइऑक्साइड, सल्फर ट्राईक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड तथा सल्फ्यूरिक एसिड
  • ऊंचाई पर उड़ने वाले वायुयान नाइट्रोजन के ऑक्साइड
  • सूती वस्त्रो का विरंजक क्लोरीन
  • धान के खेत तथा जुगाली करने वाले मवेशी-मीथेन गैस |

वायु प्रदूषण (Air Pollution):-

  • What is air pollution:- वे कारक जो वायु को प्रत्यक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं वायु प्रदूषण कहलाते हैं

वायु प्रदूषण की दो श्रेणियां हैं

  1. प्राथमिक वायु प्रदूषण :- वे वायु प्रदूषक जो सीधे स्रोत से निकलकर वायु को प्रदूषित करते हैं प्राथमिक वायु प्रदूषक कहलाते हैं जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि
  2. द्वितीयक वायु प्रदूषण :- ऐसे वायु प्रदूषण जो प्राथमिक वायु प्रदूषण तथा साधारण वातावरण के पदार्थ की क्रिया के फलस्वरुप उत्पन्न होते हैं जैसे ओजोन, अम्ल वर्षा, प्रॉक्सी, एसिटिल नाइट्रेट आदि |

वायु प्रदूषकों को दो अन्य भागों में विभक्त किया जा सकता है

  • गैसीय वायु प्रदूषण :- कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड तथा सल्फर डाइऑक्साइड आदि गैसीय वायु प्रदूषण के उदाहरण हैं
  • कणिकीय वायु प्रदूषण :- एयरोसोल धूम्र कालिख तथा वाहनयुक्त धूम्र कणिकीय वायु प्रदूषण के उदाहरण हैं
  • इनकी उत्पत्ति ताप बिजली घरों, स्वचालित मोटर वाहनों तथा घरों में जीवाश्म इंधनों, लकड़ी आदि के दहन के फल स्वरुप होती है
  • एयरोसोल यह 1 से 10 माइक्रोन आकार वाले कण होते हैं
  • धूम्र कालिख तथा वाष्पयुक्त धूम्र यह आकार में 10 माइक्रोन से छोटे कण हैं
  • शुद्ध कणिकीय पदार्थ :- 10 माइक्रोन से बड़े आकार वाले कणों को शुद्ध कणिकीय पदार्थ की संज्ञा दी जाती है

कणिकीय पदार्थों को उनकी प्रकृति के अनुसार तीन श्रेणियां में बांटा जा सकता है

  1. धात्विक कणिकीय पदार्थ : सीमा,एल्युमिनियम, तांबा, लोहा, जस्ता, कैडमियम इत्यादि
  2. धात्विक कणिकीय पदार्थ : ऐस्बेस्टस, सेरेमिक्स तथा सिल्क
  3. जैविकीय कणिकीय पदार्थ :- वायरस तथा जीवाणुओं के बिजाणु पार्थेनियम के परागकण, पादपो तथा जंतुओं से निकलने वाले वायु प्रदूषण आदि

वायु प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Environmental Pollution) :-

  • हरित गृह प्रभाव
  • वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड मेथेन आदि ग्रीन हाउस गैसों के संद्रन में वृद्धि होने से हरित गृह प्रभाव में वृद्धि होती है
  • इस कारण भूमंडलीय तापन में वृद्धि हो रही है
  • परिणाम स्वरुप जलवायु परिवर्तन हिम क्षेत्र का पिघलना आदि घटनाओं में वृद्धि हो रही है
  • कार्बन डाइऑक्साइड भूमंडलीय तापन के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी गैस है

ओजोन परत का क्षरण :-

  • क्लोरो-फ्लोरो कार्बन नाइट्रस ऑक्साइड आदि गैस है ओजोन परत के क्षरण का कारण है
  • ओजोन परत के नष्ट होने से सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर पहुंचेगी
  • इन पराबैंगनी किरणो का सबसे बड़ा खतरा त्वचा का कैंसर है
  • क्लोरो-फ्लोरो कार्बन गैसें ओजोन परत के क्षरण के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी हैं

अम्ल वर्षा :-

सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रिक ऑक्साइड गैसें वायुमंडलीय ऑक्सीजन तथा बादल के जल से अभिक्रिया करके क्रमशः सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं

  1. वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती
  2. स्वचालित वाहनों में संपीड़ित प्राकृतिक गैसों का प्रयोग
  3. ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों यथा-पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा तथा जल विद्युत ऊर्जा आदि को प्रोत्साहन
  4. गाड़ियों में कैटलिटिक कन्वर्जन स्कैबर का प्रयोग
  5. डीजल की गाड़ियों में अति सूक्ष्म मात्रा सल्फर युक्त (0.0005%) युक्त डीजल का प्रयोग
  6. उच्च एवं सुरक्षित तकनीक का विकास
  7. पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जन जागरूकता
  8. भारत सरकार द्वारा वायु प्रदूषण के नियंत्रण हेतु वायु प्रदूषण निरोध एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 पारित किया गया
  9. फैक्ट्री की चिमनियों में बाग फिल्टर का प्रयोग
  10. ध्यातव्य है कि बैग फिल्टर से 50 माइक्रोमीटर से कम ब्यास वाले कणिकीय पदार्थ पृथक किए जाते हैं
  11. 50 माइक्रोमीटर से बड़े आकार वाले कणिकीय पदार्थों को साइक्लोन सेपेरेटर या साइक्लोन कलेक्टर तथा बेटस्क्रबर नमक उपकरणों से पृथक किया जाता है
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Pollution Essay 500 Words in Hindi

जल प्रदूषण (Water Pollution) :-

जल का वर्गीकरण :- पर्यावरण शोध प्रयोगशाला लखनऊ ने जल के पांच श्रेणियां में विभाजित किया है (Water pollution essay)

  1. वर्ग “A” पीने के लिए उपयुक्त
  2. वर्ग “B” स्नान, तैराकी और मनोरंजन के लिए उपयुक्त
  3. वर्ग “C” पारस्परिक उपचार के बाद पीने योग्य
  4. वर्ग “D” वन्य जीव और मछलियों के लिए उपयुक्त
  5. वर्ग “E” सिंचाई, औद्योगिक शीतलन और अपशिष्ट निपटान हेतु उपयुक्त

परिभाषा :-

  • What is water pollution :- प्रदोषकों की उपस्थिति के कारण जल के मूल भौतिक रासायनिक व जैविक गुणो में अवांछित परिवर्तन को जल प्रदूषण कहते हैं

जल प्रदूषण के कारण :-जल प्रदूषण के निम्नलिखित कारण है –

1.घरेलू अपशिष्ट :-

  • अपमार्जक और वाहित मल, कूड़ा-कचरा, सड़ी सब्जियां, खाद्यान्न, पॉलिथीन, कपड़े धोने के लिए प्रयुक्त साबुन आदि

2.औद्योगिक प्रदूषक :-

  • औद्योगिक अपशिष्ट जल
  • औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे से रासायनिक प्रदूषक- क्लोराइड, सल्फाइड, कार्बोनेटेड, अमोनिकल नाइट्रोजन आदि
  • औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे से धात्विक पदार्थ सीसा, जस्ता, तांबा, कार्बनिक, रासायनिक यौगिक, रेडियोएक्टिव अपशिष्ट आदि

3.कृषि कार्यों में प्रयुक्त रसायन :- उर्वरक, कवकनशी,शाकनासी, कीटनाशी, जीवाणुनासी तथा पौधे के अपशिष्ट भाग आदि

4.प्राकृतिक प्रदूषक :- प्राकृतिक प्रदूषक भूस्खलन, मृदा-अपरदन तथा ज्वालामुखी विस्फोट आदि

5.भूमिगत जल प्रदूषक :-

  • कीटनाशी, औद्योगिक कचरा आदि के विषाक्त रसायन से युक्त जल रिसाव द्वारा भूमिगत जल को प्रदूषित करते हैं

  • आर्सेनिक भूमिगत जल को सर्वाधिक प्रदूषित करता है
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जल प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव (Effects of water pollution) :-

  1. प्रदूषण जल से हैजा, तपेदिक, पीलिया, मियादी ज्वार, पेचिश आदि बीमारियां फैलती हैं
  2. एस्बेस्टस रेशों से युक्त जल के सेवन से एस्बेस्टस नामक रोग हो जाता है इसके द्वारा फेफड़े का कैंसर तथा पेट के रोग उत्पन्न होते हैं
  3. पारा युक्त जल के सेवन से मिनीमाता रोग होता है
  4. पेयजल में नाइट्रेट की अधिकता से ब्लू बेबी सिंड्रोम रोग होता है
  5. इटाई-इटाई रोग जल में कैडमियम की अधिकता से होता है
  6. आर्सेनिक की अधिकता से ब्लैक फुट नामक बीमारी होती है
  7. नदियों, झीलों तथा तालाबों में जैविक तथा अजैविक पोषक तत्वों के सान्द्रण में वृद्धि होने से यूट्रॉफिकेशन या सुपोषण हो जाता है परिणाम स्वरुप जलीय पौधे हैं जीवो में भारी मात्रा में वृद्धि होती है
  8. सागर के तटीय भागों में खनिज तेलों के रिसाव से उत्पन्न मिल आयल स्लिक्स तथा कारखाने के विषाक्त अपशिष्ट सागरीय जीव जंतु की मृत्यु का कारण बनते हैं
  9. जल प्रदूषण का निर्धारण जल में घुली ऑक्सीजन की मात्रा BOD – Biological Oxygen Demand (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) के आधार पर की जाती है
  10. भारत सरकार द्वारा जल प्रदूषण के नियंत्रण हेतु जल प्रदूषण निरोध एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 पारित किया गया

 

मृदा प्रदूषण (Land pollution) :-

  • Land pollution definition :- प्राकृतिक तथा मानव जनित करणो से मृदा की गुणवत्ता में ह्रास को मृदा प्रदूषण कहते हैं

मृदा प्रदूषण के कारण :-

मृदा प्रदूषण के कर्म को दो वर्गों में बांट सकते हैं

  • प्राकृतिक कारण
  • मानव जनित कारण
  • प्राकृतिक कारण

  1. वर्षा :- अत्यधिक वर्षा से मृदा अपरदन के कारण मिट्टी के पोषक तत्वों की हानि होती है
  2. वायु :- शुष्क तथा आर्दशुष्क क्षेत्र में तेज वायु से मृदा की ऊपरी परत उड़ जाती है इस कारण मृदा की गुणवत्ता प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती है
  3. तापमान :- अत्यधिक तापमान से मिट्टी के कण विखंडित हो जाते हैं इससे मृदा में रहने रहने वाले पोषक जीव केंचुए तथा नाइट्रीकरण, बैक्टीरिया आदि मर जाते हैं
  4. ज्वालामुखी उद्गार :- ज्वालामुखी उद्गार से भूमि में दरारें पड़ जाती हैं इससे निकलने वाला लावा भी मृदा को प्रदूषित करता है
  5. भूकंप :- भूकंप से भूमि उबड़ खाबड़ हो जाती है गड्ढे बनने तथा भूमि के धसने से भूमि की क्षमता का ह्रास होता है

मानव जनित कारण :-

१. औद्योगिक अपशिष्ट :-

  • उद्योगों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट मृदा को दूषित प्रदूषित करते हैं उदाहरण स्वरूप तांबा गलने वाली औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट मृदा को इस हद तक प्रदूषित कर देता है कि उसके बाद वहां कोई वनस्पति ग ही नहीं सकती
  • कल का कलकारखानों से निकलने वाली प्रदूषणकारी गैसे सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड वायुमंडलीय नमी से अभिक्रिया करके अम्ल वर्षा द्वारा मृदा की अम्लीयत बढ़ाते हैं
  • मृदा में अम्लीयत का अत्यधिक अत्यधिक सांद्रण फसलों के लिए हानिकारक होता है

२. खनन कार्य :-

  • खनिज पदार्थ जैसे- अभ्रक, कोयला, सोना आदि के उत्खनन से मृदा की बड़े पैमाने पर हानि होती है
  • अभ्रक, कोयला और चुने आदि के कणिकाए पदार्थ मृदा के भौतिक तथा रासायनिक गुना में अवांछित परिवर्तन करते हैं

३. पीड़कनाशी तथा रासायनिक खादों का प्रयोग

  • रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा के भौतिक तथा रासायनिक गुना में परिवर्तन हो जाता है
  • पीड़कनाशी, पादपनशी आदि जैवनाशी रसायन मृदा में पहुंचकर सूक्ष्म जीवों बैक्टीरिया आदि को नष्ट कर देते हैं
  • जैवनाशी रसायन आहार श्रृंखला के माध्यम से मनुष्य तथा जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं
  • ध्यातव्य है कि जैवनाशी रसायनों की रेंगती मृत्यु कहा जाता है
  • अजैवक्षरनीय ठोस अपशिष्ट पदार्थ का निस्तारण
  • कांच प्लास्टिक और पॉलिथीन आदि अजैवक्षरनीय पदार्थ मिट्टी की गुणवत्ता का हर्ष करते हैं

अन्य कारण :-

  • नगरीय अपशिष्टों का खेतों में जमाव सीवेज और उद्योगों से निकलने वाले जल से फसलों की सिंचाई मानव मल मुत्र तथा जानवरों के मल मूत्र का विसर्जन और यूकेलिप्टस जैसे पौधों का रोपण आदि कारणों से भी मृदा दूषित प्रदूषित होती है

मृदा प्रदूषण के प्रभाव (Effects of land pollution) :-

  • बड़े पैमाने पर अवनालिका अपरदन से संबंधित क्षेत्र उबड़ खाबड़ हो जाता है और वीहड़ का निर्माण होता है
  • इस कारण भूमि बंजर हो जाती है तथा कृषि एवं वनस्पतियां नष्ट हो जाती हैं
  • कीटनाशी तथा रासायनिक उर्वरक आहार श्रृंखला के माध्यम से मानव तथा जीव जंतुओं के स्वास्थ्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं
  • मृदा की गुणवत्ता में ह्रास से उत्पादन प्रभावित होता है

मृदा प्रदूषण नियंत्रण के उपाय :-

  1. मृदा संरक्षण प्रणालियों को प्रोत्साहन
  2. वनोन्मूलन पर प्रतिबंध
  3. वनरोपण द्वारा मृदा अपरदन का रोकना
  4. झूमिंग कृषि पर प्रतिबंध
  5. भूमि उपयोग तथा फसल प्रबंधन को बढ़ावा देना
  6. जैवनाशी रसायनों का सीमित उपयोग
  7. जैविक कृषि को प्रोत्साहन आदि

ध्वनि प्रदूषण (Sound Pollution) :-

  • ध्वनि अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग है
  • ध्वनि की आवृत्ति मापने की इकाई हर्टज है

आवृत्ति के आधार पर ध्वनि के तीन प्रकार हैं (Sound pollution essay)

  1. श्रव्य :- ऐसी ध्वनि तरंगें 20 से 20000 हर्ट्स तक होती हैं जिन्हें मनुष्य द्वारा सुना जा सकता है इस मनुष्य का श्रव्य परास रहते हैं
  2. अपश्रव्य :- श्रव्य परास कम आवृत्ति की तरंग को अपश्रव्य तरंगे कहते हैं
  3. पराश्रव्य :- श्रव्य परास से अधिक आवृत्ति की तरंगों को पराश्रव्य तिरंगे कहते हैं

ध्वनि प्रदूषण (What is sound pollution) :-

  • अवांछित शोर के कारण मानव वर्ग में उत्पन्न अशांति एवं बेचैनी की दशा को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं
  • प्रयोगात्मक परीक्षणों के अनुसार 75 डेसीबल से कम तीव्रता की ध्वनि का मानव जीवन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है
  • ध्यातव्य है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 30 डेसीबल से अधिक तीव्रता की ध्वनि मनुष्य के लिए हानिकारक होती है
  • ध्वनि की तीव्रता का मात्रक डेसीबल है

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Sound Pollution) :-

  1. बातचीत में बाधा
  2. श्रवण क्षमता में कमी
  3. उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोग
  4. अनिद्रा, चिंता, तनाव, चिड़चिड़ापन आदि
  5. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव
  6. गर्भावस्था शिशु पर प्रभाव

रेडियोधर्मी प्रदूषण :-

  • रेडियोएक्टिव पदार्थ के विकिरण से जनित प्रदूषण रेडियोधर्मी प्रदूषण कहलाता है
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण मापने की इकाई रोन्टजेन है इसे रैम भी कहते हैं
  • 20 मिलीमीटर रैम तक का विकिरण जीवधारी को कोई विशेष क्षति नहीं पहुंचता है
  • रेडियोएक्टिव प्रदूषण को दो वर्गों में बांटा जाता है

प्राकृतिक स्त्रोत्र :-

  1. ब्रह्मांड विकर्ण है या कस्मिक करने
  2. भूमि में उपस्थित रेडियोसक्रिय पदार्थ-यूरेनियम, थोरियम प्लूटोनियम आदि
  3. प्राकृतिक स्रोतों के वितरण से कोई विशेष हानि नहीं होती है

मानव जनित स्रोत :-

  1. परमाणु परीक्षण
  2. रेडियो समस्थानिक
  3. नाभिकीय संयंत्र
  4. रेडियोधर्मी अपशिष्ट

रेडियोधर्मी प्रदूषण के प्रभाव :-

रेडियोधर्मी कण जल एवं मृदा के माध्यम से पौधों एवं वनस्पतियों में जमा हो जाते हैं आहार श्रृंखला के माध्यम से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करके विभिन्न बीमारियों को जन्म देते हैं

  • नाभिकीय विकिरण के जैविक प्रभाव दो प्रकार के होते हैं कायिक एवं अनुवांशिक
  • कायिक प्रभाव विकिरण से प्रभावित लोगों तक सीमित होता है जबकि अनुवांशिक प्रभाव पीढ़ियां के प्रजनन को भी प्रभावित करते हैं
  • आयनीकरण द्वारा नाभिकीय विकिरण जीवित ऊतकों के जटिल अणुओ को विघटित कर कोशिकाओं को नष्ट कर देता है
  • इन मृत कोशिकाओं से कैंसर बझापन और चर्म रोग हो सकता है
  • नाभिकीय विकिरण से रक्त कोशिका तथा अस्थिमज्जा में अवांछित परिवर्तन हो जाता है
  • सभी प्रदूषणों में रेडियोधर्मी प्रदूषण सबसे अधिक घातक होता है क्योंकि इसके प्रभाव से जल, वायु एवं मृदा तीनों प्रदूषित होते हैं
  • 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 को जापान के दो शहरों क्रमशः हिरोशिमा तथा नाकासाकी पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराया
  • 1979 ईस्वी में अमेरिका के थ्रीमाइल आयरलैंड में परमाणु दुर्घटना हुई
  • यूक्रेन के चेर्नोविल परमाणु बिजली संयंत्र में 1986 में परमाणु दुर्घटना हुई
  • मार्च 2011 में सुनामी के कारण जापान का  फुकुशीमा परमाणु संयंत्र दुर्घटनाग्रस्त हो गया

बचाव के उपाय :-

  1. नाभिकीय रिएक्टरों से विकिरणों के विसरण को रोका जाना चाहिए
  2. रेडियोएक्टिव अपशिष्ट को तर्कसंगत एवं सही ढंग से निवृत किया जाना चाहिए
  3. मानव प्रयोग के उपकरणों को रेडियोधर्मिता से मुक्त किया जाना चाहिए
  4. परमाणु अस्त्रों तथा का उत्पादन एवं प्रयोग प्रतिबंधित होना चाहिए
  5. चश्मा आदि लगातार अल्ट्रावायलेट विकिरणों से बचना चाहिए
  6. नाभिकीय विखंडन नाभिकीय विकिरण अवपात से बचने के लिए पोटेशियम आयोडाइड की गोलियों का सेवन किया जाता है

विद्युत चुंबकीय विकिरण :-

१. विद्युत चुंबकीय तरंग :-

  • विद्युत चुंबकीय तरंग की अवधारणा का प्रतिपादन मैक्सवेल ने किया
  • इन तरंगों के संरक्षण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है अर्थात यह तरंगे निर्वात में भी चल सकती हैं
  • सभी विद्युत चुंबकीय तरंगे प्रकाश की चाल से गमन करती हैं
  • यह तरंगे फोटोन की बनी होती है
  • विद्युत चुंबकीय तरंगेयों का तरंग दर्द परिसर (10 का घात – 14 मीटर से लेकर 10 का घात 5 मीटर) तक होता है
  • प्रकाश उसमें विकिरण एक करने रेडियो तरंगे आदि विद्युत चुंबकीय तरंगों के उदाहरण हैं |

विद्युत चुंबकीय तरंगों के गुण :-

  • विद्युत चुंबकीय तरंगे उदासीन होती हैं यह अनुप्रस्थ होती हैं यह प्रकाश के वेग से गमन करती हैं इनके पास ऊर्जा एवं संवेग होता है

विद्युत चुंबकीय तरंगों के प्रकार :-

रेडियो तरंग

  • निम्नतम आवृत्ति और उच्चतम तरंग दैर्ध्य वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों को रेडियो तरंग कहते हैं
  • रेडियो तरंग की आवृत्ति 10 का घात 5 हर्टज से कम होती है
  • सूक्ष्म तरंग या माइक्रोवेब
  • रेडियो तरंगों की अपेक्षा जिन तरंगों की आवृत्ति अधिक हो और तरंग दैर्ध्य कम होता है उन्हें सूक्ष्म तरंग या माइक्रोवेव कहते हैं
  • माइक्रो वेव के अंतर्गत अवरक्त तरंगे, दृश्य प्रकाश, एक्स किरने तथा गामा किरणें आती हैं
  • इन सभी माइक्रोवेव की आवृत्ति एवं तरंग दैर्ध्य अलग-अलग हैं

विद्युत चुंबकीय विकिरण :-

  • अंतरिक्ष ( माध्यम हीन ) अथवा पदार्थ माध्यम में विद्युत चुंबकीय तरंगों के माध्यम से ऊर्जा संप्रेषित करने को विद्युत चुंबकीय विकिरण कहते हैं

विद्युत चुंबकीय विकिरण प्रदूषण :- 

उच्च वोल्टेज क्षमता के विद्युत संप्रेषण तारों तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले विकिरण द्वारा जीवन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को विद्युत चुंबकीय विकिरण प्रदूषण कहते हैं

रेडियो वेब और माइक्रोवेव के सामान्य स्त्रोत :-

  1. रेडियो वेब के सामान्य स्रोत हैं- रेडियोसेट, मोबाइल वायरलेस, सेट जिसे पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग और अन्य इमरजेंसी विभाग वाले प्रयोग करते हैं
  2. माइक्रोवेव का प्रयोग रडार के अलावा 90% से अधिक टेलिविजनों में तथा करीब 35% लंबी दूरी के समाचार संप्रेषण (टेलीफोन भी शामिल) में हो रहा है
  3. रेडियो टेलीस्कोप तथा उपग्रह संचार में भी माइक्रोवेव का प्रयोग होता है
  4. भोजन को पकाने हेतु माइक्रोवेव  ओवेन्स का प्रयोग किया जाता है
  5. हमारे घर व कार्यालय में जो प्रत्यावर्ती धारा बिजली के मोटे तारों से उच्च वोल्टेज संप्रेषण के द्वारा पहुंचती हैं उसे लंबी रेडियो वेब निकलते हैं
  6. इन संप्रेषण लाइनों के समीप भी शक्तिशाली विद्युत चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है

माइक्रोवेव और रेडियो वेव के प्रभाव :-

  1. वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है की आंखों अंडकोषों पाचन तंत्र पित्ताशय तथा मूत्राशय को माइक्रोवेव से हानि होती है
  2. माइक्रोवेव मानव शरीर में श्वसन और रक्त संचार को बढ़ा देती है जिसके कारण हृदय के ऊतकों का छय होता है और परिणामता प्रभावित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है
  3. माइक्रोवेव्स कीटों तथा स्तनपाइयों की कोशिकाओं में जीनीय उत्सर्जन उत्पन्न करती है
  4. अधिक मात्रा में माइक्रोवेव्स के सक्षम उद्भाषण कैंसर व रक्त संबंधी व्याधियां भी कारित सकती हैं
  5. विद्युत पावर लाइनों से उत्पन्न विकिरण का चिंपांजियों पर किए गए प्रयोग में पाया गया कि उनके शरीर में मानसिक तनाव उत्पन्न करने वाला हारमोंस स्रावित हुआ
  6. ऐसे हार्मोन्स हमारी रोगनिरोधी क्षमता पावर को समाप्त कर देते हैं

माइक्रोवेव और रेडियो वेब से बचने के उपाय :-

  • उच्च वोल्टेज के बिजली के तार जो सिर के ऊपर से गुजरते हैं उनसे 60 मीटर दूर रहना चाहिए
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का यथासंभव कम प्रयोग करना चाहिए
  • सेलुलर फोन, वॉकी-टॉकी तथा कॉर्डलेस फोन आदि का जहां तक हो सके कम प्रयोग करना चाहिए
  • टेलीफोन व कंप्यूटर आदि का सुरक्षात्मक शील्ड कवच का प्रयोग करना चाहिए
  • सरकार को चाहिए की समाचार पत्रों का टेलीविजन के माध्यम से विद्युत चुंबकीय विकिरण के दुष्प्रभाव के प्रति महीने में एक बार सचेत करते रहना चाहिए

पर्यावरण प्रदूषण रोकने हेतु भारत सरकार द्वारा किए गए प्रयास :-

एगमार्क :-

  • पर्यावरण अनुकूल उपभोक्ता वस्तुओं की अलग पहचान हेतु एगमार्क लेवल की व्यवस्था अपनाई गई है
  • भारतीय मानक ब्यूरो चिन्ह तथा निरीक्षण निदेशालय इस योजना को लागू करने वाली प्रमुख एजेंसियां हैं
  • यह प्रमाण पत्र भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा 1991 से प्रदान किया जा रहा है

फ्लाई एश मिशन :-

  • फ्लाई एश ताप विद्युत ग्रहों से निकलने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है
  • फ्लाई एस मिशन के तहत इसे उन्नत तकनीकी द्वारा लाभदायक संसाधन मेटेरियल में परिवर्तित किया जा रहा है
  • फ्लाई एश से कंक्रीट, ब्लॉक, ईटो, पैनल तथा सीमेंट आदि का निर्माण किया जा सकता है

गंगा कार्य योजना :-

  • भारत सरकार द्वारा गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया है
  • गंगा नदी के जल को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से 1985 ईस्वी में गंगा कार्य योजना की शुरुआत की गई
  • 1985 ईस्वी में केंद्रीय गंगा प्राधिकरण स्थापना की गई तथा एक गंगा परियोजना निदेशालय का गठन किया गया
  • केंद्रीय गंगा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं
  • गंगा कार्य योजना का प्रथम चरण 1986 से 1993 तक चला

राष्ट्रीय नदी संरक्षण कार्य योजना :-

  • केंद्र सरकार द्वारा 1995 ईस्वी में राष्ट्रीय नदी संरक्षण कार्य योजना आरंभ की गई
  • इसके अंतर्गत 38 नदियों के संरक्षण की योजना है जो की 20 राज्यों और 178 शहरों में फैली हुई है
  • इस योजना में गंदे जल को शोधित करना नदी तट विकास कार्य तथा वृक्षारोपण एवं नदी के स्वछीकरण से संबंधित जागरूकता पैदा करना जैसे कार्यक्रम शामिल हैं

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड :-

  • सितंबर 1974 ईस्वी में केंद्र सरकार द्वारा जल प्रदूषण नियंत्रण एवं रोकथाम अधिनियम 1974 के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की गई
  • बोर्ड वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है
  • यह जल एवं वायु प्रदूषण के मूल्यांकन निगरानी और नियंत्रण के लिए एक शीर्ष राष्ट्रीय संस्था है
  • बोर्ड का जल प्रदूषण नियंत्रण एवं रोकथाम अधिनियम 1974 वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं रोकथाम अधिनियम 1981 तथा जल उपस्कर अधिनियम 1977 को लागू करने का कार्यकारी उत्तरदायित्व है
  • इसके अतिरिक्त बोर्ड द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 को लागू करने के लिए जल वायु और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित समस्त सेवाओं की रोकथाम में नियंत्रण के लिए सलाह दी जाती है

जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान :-

  • अगस्त 1988 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान की स्थापना की गई
  • यह पर्यावरण एवं मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त शासी संस्थान है
  • यह संस्थान समस्त भारतीय हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं बेहतर पर्यावरण विकास के लिए वैज्ञानिक जानकारी को उपलब्ध कराने तथा प्रभावी प्रबंधन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख संस्था के रूप में जाना जाता है
  • इस संस्थान का मुख्यालय अल्मोड़ा में है
  • वर्तमान में इसकी कर इकाइयां श्रीनगर (गढ़वाल इकाई)  मोहन कुल्लू (हिमाचल इकाई) टैगोर गंगटोक (सिक्किम इकाई) तथा ईटानगर (पूर्वोत्तर राज्य इकाई) कार्यरत हैं

संस्थान की शोध विकास संबंधी गतिविधियां निम्नलिखित सात कार्यक्रमों के तहत संचालित हैं

  1. भूमि एवं जल संसाधन प्रबंधन
  2. ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
  3. जैव विविधता संरक्षण
  4. पारिस्थितकी अर्थशास्त्र एवं पर्यावरण प्रभाव आकलन संस्थागत नेटवर्किंग संजालीकरण
  5. मानव संसाधन विकास
  6. पर्यावरण विज्ञान
  7. जैव प्रौद्योगिकी तथा पारस्परिक ज्ञान पद्धति

कुछ प्रमुख परियोजना के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव :-

नदी घाटी परियोजना :-

  1. अपवाह क्षेत्र में कटाव
  2. कमांड क्षेत्र का विकास
  3. प्रभावित लोगों का पुनर्वास
  4. विभिन्न जली बीमारियों में वृद्धि
  5. जलाशयों के कारण होने वाले भूकंपीय प्रभाव
  6. वनों का कटाव तथा वनस्पतियों एवं अन्य प्राणियों का नुकसान

खनन परियोजनाएं :-

  • भूमिका कटाव
  • सतत एवं भूगर्भीय जल संसाधनों में प्रदूषण
  • वायु प्रदूषण
  • वनस्पतियों एवं जीव जंतुओं के साथ-साथ वनों की हानि
  • प्रभावित आबादी जनजातीय सहित का पुनर्वास
  • ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों में बीमारकों का प्रभाव

ताप विद्युत परियोजना (Environmental Pollution Essay In Hindi) :-

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. वनों की कटाई
  4. पुनर्वास
  5. भूमि का अपरदन

औद्योगिक परियोजनाएं (Environmental Pollution Essay In Hindi) :-

  • वायु प्रदूषण
  • जल प्रदूषण
  • मृदा प्रदूषण
  • ध्वनि प्रदूषण
  • अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

परिवहन क्षेत्र (Environmental Pollution Essay In Hindi) :-

  • प्राकृतिक व भौतिक संसाधनों की हानि
  • प्राकृतिक स्थिति की संसाधन का ह्रास
  • मानवीय आर्थिक विकास संसाधन में ह्रास
  • सांस्कृतिक एवं अन्य भौतिक मूल्यों पर प्रहार
  • वायु प्रदूषण
  • ध्वनि प्रदूषण

आणविक ऊर्जा (Environmental Pollution Essay In Hindi) :-

  • वायु जल एवं मृदा पर विकिरण प्रभाव
  • तापीय जल के निक्षेप से तापीय प्रदूषण
  • वनों तथा प्राणी जगत को नुकसान
  • पुनर्वास की समस्या
  • रेडियोधर्मी निक्षेपों के निष्कासन की समस्या
  • स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव

यह भी पढ़ें :-

  1. पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक :-
  2. जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास के कारण :-
  3. हरितगृह प्रभाव एवं जलवायु परिवर्तन :-
  4. पारिस्थितिकी तंत्र क्या है 
  5. चट्टान किसे कहते हैं चट्टान के प्रकार :-
  6. ओजोन परत क्या है :-
  7. पवन क्या हैं पवन के प्रकार :-
  8. ग्रहों से सम्बंधित तथ्य :-
  9. भारत में वनों के प्रकार
  10. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम
  11. जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय:-

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