Green House Effect In Hindi: हरितगृह प्रभाव एवं जलवायु परिवर्तन

Green House Effect In Hindi: हरित गृह प्रभाव का सीधा संबंध भूमंडलीय तापन में वृद्धि से है वैश्विक स्तर पर औद्योगीकरण के बढ़ते प्रभाव के कारण कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन, क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन आदि ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में तीव्र वृद्धि हुई है भूमंडलीय तापन के लिए मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड उत्तरदायी है वैज्ञानिकों के अनुसार यदि वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा इसी तरह बढ़ती रही तो 23 शताब्दी की तुलना में 2030 तक विश्व के औसतन तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो जाएगी।

Green House Effect In Hindi: हरितगृह प्रभाव एवं जलवायु परिवर्तन
Green House Effect In Hindi: हरितगृह प्रभाव एवं जलवायु परिवर्तन

भूमंडलीय तापन के कारण हिम क्षेत्र पिघलेंगे परिणामस्वरुप समुद्री जल स्तर 2.5 मीटर से 3 मीटर तक बढ़ जाएगा इससे अनेक दीपों और तटीय क्षेत्र के डूबने की आशंका है, उदाहरण के लिए प्रशांत महासागर का तुबालू और कार्टरेट प्रायः डूब गए हैं तथा मालदीप की डूबने की आशंका है वैश्विक जलवायु परिवर्तन जैव-विविधता की हानि आदि भूमंडलीय तापन के ही दुष्परिणाम है

(Green House Effect) हरित गृह प्रभाव

वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन आदि गैसें सौर विकरण की लघु तरंगों के लिए पारगम्य होती हैं, परंतु पार्थिवविकरण की दीर्घ तरंगों को अवशोषित कर लेती हैं इस कारण वायुमंडल का तापमान बढ़ जाता है इसे ही हरित गृह प्रभाव कहते हैं

  • हरित गृह प्रभाव के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड ,क्लोरोफ्लोरोकार्बन आदि गैसें उत्तरदायी हैं
  • कार्बन डाइऑक्साइड मेथेन आदि ग्रीनहाउस गैसों के कारण वातावरण के तापमान में हो रही वृद्धि को ही भूमंडलीय तापन कहते हैं
  • भूमंडलीय तापन के लिए मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्तरदाई है क्योंकि विभिन्न गैसों में इसकी मात्रा सर्वाधिक है
  • कार्बन डाइऑक्साइड भारी गैस है एवं वायुमंडल के प्रति विकरण के लिए अपारगम्मता को बढ़ाता है सर्वप्रथम 1924 ईस्वी में जोसेफ फोरिआर ने ग्रीनहाउस गैस की संकल्पना की थी
  • ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करने की सर्वाधिक तीव्रता क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) में होता है
  • वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड का सर्वाधिक उत्सर्जन चीन करता है
  • अमेरिका दूसरे तथा भारत तीसरे तथा रूसी संघ चौथे स्थान पर हैं
  • कार्बन डाइऑक्साइड का प्रति व्यक्ति सर्वाधिक उत्सर्जन संयुक्त राज्य अमेरिका करता है

ग्रीन हाउस प्रभाव एवं भूमंडलीय तापन के कारण (Green house effect and global warming)

  1. जीवाश्म ईंधन, कोयला, पेट्रोलियम आदि
  2. निर्वनीकरण जंगलों की कटाई
  3. अनुकूलित यंत्र अग्नि श्रमिकों एवं फार्म निर्माण आदि से उत्सर्जित होने वाले क्लोरोफ्लोरोकार्बन
  4. धान के खेत, नम भूमियों एवं पशुओं की चुगली से निकलने वाला मीथेन गैस
  5. औद्योगीकरण एवं शहरीकरण आदि

हरित गृह प्रभाव में भूमंडलीय तापन के परिणाम

  1. हिम क्षेत्रों का पिघलना
  2. समुद्र तल का ऊपर उठाना
  3. महासागरीय धाराओं में परिवर्तन
  4. वैश्विक जलवायु परिवर्तन (बाढ़, सूखा, आदि)
  5. उष्ण कटिबंधीय चक्रवातो की संख्या एवं तीव्रता में वृद्धि
  6. अतः उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में परिवर्तन
  7. बीमारियों का फैलाव
  8. मिट्टी में आद्रता की कमी
  9. कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव
  10. जंगलों पर प्रभाव
  11. जैव-विविधता का ह्रास आदि

हरितगृह प्रभाव एवं भूमंडलीय तापन को रोकने के उपाय

क्योटो प्रोटोकॉल :-

  • 11 दिसंबर 1997 को जापान के क्योटो शहर में यूएनएफसीसीसी (UNFCCC) के तीसरे सम्मेलन में क्योटो प्रोटोकॉल को स्वीकार किया गया
  • यह एक कानूनी बाध्यकारी समझौता है क्योटो प्रोटोकॉल में पहली बार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए औद्योगिकीकृत राष्ट्रों पर बाध्यताएं निर्धारित की गई
  • औद्योगिककृत विकसित देशों के उत्सर्जन को 2012 तक 5.2% की कटौती के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रोटोकॉल ने तीन सहकारी क्रियान्वयन तंत्र का प्रावधान किया
  • सहकारी क्रियान्वयन तंत्र में अन्य विकसित देश के साथ किसी परियोजना का संयुक्त क्रियान्वयन इमिशन ट्रेडिंग और स्वच्छ विकास तंत्र शामिल थे

स्वच्छ विकास तंत्र :-

  • स्वच्छ विकास तंत्र विकसित देशों में सरकारों एवं कंपनियों को विकसित देशों में किए गए स्वच्छ प्रौद्योगिकी निवेश पर ऋण अर्जित करने की अनुमति देता है
  • इस ऋण को ही कार्बन क्रेडिट कहा जाता है
  • अमेरिका, कनाडा या ब्रिटेन जैसे विकसित देश कार्बन क्रेडिट के हकदार तभी होते हैं जब उनके द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा स्वच्छ विकास तंत्र किसी विकासशील देश को दुरुस्त प्रौद्योगिकी तक पहुंच उपलब्ध कराते हो तथा सतत विकास को बढ़ावा देने में सहायक हो
  • क्योटो प्रोटोकॉल के प्रावधान के अनुसार प्रतिनिधि मेट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम कर एक कार्बन क्रेडिट हासिल किया जा सकता है
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कार्बन क्रेडिट का क्रय विक्रय उसके वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार किया जाता है

कार्बन व्यापार और भारत

  1. भारत में कार्बन व्यापार पूर्ण विकसित अवस्था में पहुंच चुका है
  2. कार्बन व्यापार की शुरुआत भारत में संस्थागत खरीदारों जैसे विश्व बैंक के प्रोटोटाइप फंड से होती है
  3. भारत के प्रमुख कार्बन खरीददार संस्थान विश्व बैंक और जापान एचसी रिडक्शन फंड वित्तीय संस्थान जैसे केएफडब्ल्यू निजी क्षेत्र बीपी सेल और न्युआन इत्यादि हैं
  4. भारत सरकार ने दिसंबर 2003 में राष्ट्रीय स्वच्छ विकास प्रणाली प्राधिकरण का गठन किया

कार्बन फुटप्रिंट (Green House Effect In Hindi)

  • ग्रीन हाउस गैस के प्रति व्यक्ति या प्रति औद्योगिक इकाई उत्सर्जन की मात्रा को उसे व्यक्ति या औद्योगिक इकाई का कार्बन फुटप्रिंट कहा जाता है
  • कार्बन फुटप्रिंट को निकालने के लिए विश्व भर में लाइफ साइकिल असेसमेंट विधि का प्रयोग किया जाता है
  • इस विधि के अंतर्गत व्यक्ति का औद्योगिक इकाई द्वारा वातावरण में उत्सर्जन कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों की कुल मात्रा को जोड़ा जाता है
  • आमतौर पर कार्बन फुटप्रिंट को कार्बन डाइऑक्साइड के ग्रीन उत्सर्जन में मापा जाता है क्योंकि अन्य ग्रीन हाउस गैसों का ग्लोबल वार्मिंग में योगदान कमोवेश कार्बन डाइऑक्साइड जितना ही होता है |
  • Green House Effect In Hindi :-

यह भी पढ़ें :-

  1. पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा,और इसके घटक 
  2. जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास के कारण
  3. पारिस्थितिकी तंत्र क्या है 
  4. चट्टान किसे कहते हैं चट्टान के प्रकार
  5. ओजोन परत क्या है 
  6. पवन क्या हैं पवन के प्रकार
  7. ग्रहों से सम्बंधित तथ्य
  8. हरितगृह प्रभाव

6 thoughts on “Green House Effect In Hindi: हरितगृह प्रभाव एवं जलवायु परिवर्तन”

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