Maulik Adhikar kya hai, Fundamental Rights In Hindi संविधान भाग-3 की पूरी जानकारी

भारतीय संविधान के भाग-3 में (अनुच्छेद 12-35) तक मूल अधिकारों का वर्णन किया गया है मौलिक अधिकार के संबंध में संविधान निर्माता अमेरिकी संविधान से प्रभावित है भारतीय संविधान का भाग तीन को भारत का मैग्नाकार्टा की संख्या प्रदान की गई है Maulik Adhikar kya hai, Fundamental Rights In Hindi (मौलिक अधिकार इन हिंदी) संविधान भाग-3 की पूरी जानकारी प्रदान किया गया है |

भारतीय संविधान के द्वारा बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति के लिए मूल अधिकार के संबंध में गारंटी दी गई है इनमें प्रत्येक व्यक्ति के लिए सम्मान, राष्ट्रहित और राष्ट्रीय एकता को सम्मिलित किया गया है आर्टिकल को अंत जरूर पढ़े।

Maulik Adhikar kya hai, Fundamental Rights In Hindi संविधान भाग 3 की पूरी जानकारी
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Fundamental Rights In Hindi (मौलिक अधिकार क्या है)

  • Maulik Adhikar Kya Hai :- “मौलिक अधिकार वह अधिकार होते हैं जो भारतीय संविधान के द्वारा मूल तथा परिहार्य रूप से प्रदान किए गए हैं”
  • मूल अधिकार को यह नाम इसलिए भी दिया गया है क्योंकि इसे संविधान द्वारा गारंटी और सुरक्षा प्रदान की गई है जो राष्ट्र कानून का मूल सिद्धांत है, यह मूल इसलिए भी है क्योंकि यह व्यक्ति के चौमुखी विकास- भौतिक, बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए अति आवश्यक है मूल संविधान में Maulik Adhikar (मौलिक अधिकार कितने है Fundamental Rights) की संख्या 7 थी जो निम्नलिखित है
  1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
  5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
  6. संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 31
  7. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32) 
  • संपत्ति का अधिकार 44 में संवैधानिक संशोधन अधिनियम के द्वारा 1978 ईस्वी में इस मूल अधिकार हटा करके संविधान के भाग-12 (अनुच्छेद-300 क) के तहत मात्र कानूनी अधिकार बना दिया गया

समानता का अधिकार :-

विधि के समक्ष समता एवं विधियों का समान संरक्षण Article 14 के अनुसार :- Maulik Adhikar kya hai : भारत के राज्य क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को विधि के समक्ष समानता या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जाएगा प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह नागरिक हो या विदेशी सब पर यह अधिकार लागू होता है अर्थात ऊंचा-नीचा, अमीर-गरीब, अधिकारी-गैर-अधिकारी कानून से बढ़कर कोई नहीं है

  • Note:- विधि के समक्ष समानता का विचार ब्रिटिश मूल के संविधान से प्रभावित है जबकि विधियों के समान संरक्षण अमेरिकी संविधान से प्रभावित है

धर्म मूल वंश लिंग और जन्म स्थान के आधार पर विभेद नहीं किया जाएगा अनुच्छेद 15 के अनुसार :- देश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, मूल वंश, जाति लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा

  • जैसे दुकान सार्वजनिक भजन न्यायालय होटल और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थान में प्रवेश के आधार पर कुआ तालाब एस्नान घटो इत्यादि स्थानों किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा

क्रीमीलेयर क्या है :-

Maulik Adhikar Aya Hai In Hindi: क्रीमीलेयर से तात्पर पिछड़े वर्ग के विभिन्न तबकों के छात्र क्रीमीलेयर विकल्प का चुनाव करते है और इनको OBC आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता है जबकी जो अभ्यर्थी आवेदन के दौरान Non Creamy Layer के विकल्प पर चुनाव करते हैं Non Creamy Layer Certificate लगाना होता है उन अभ्यर्थियों को ओबीसी आरक्षण प्राप्त होता है अर्थात वे क्रीमीलेयर मानक से बाहर होते हैं जैसे :-

  1. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, के न्यायाधीश, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक आदि संवैधानिक पद सुशोभित करने वाले व्यक्ति को क्रीमी लेयर कैटेगरी में रखा जाता है |
  2. ग्रुप ए ग्रुप बी की सेकंड क्लास में सेवारत अधिकारी को क्रिमी लेयर के अंतर्गत रखा जाता है इसके साथ ही प्रतिष्ठानों- बैंक बीमा कंपनियां विश्वविद्यालय आज के पदाधिकारी को इस कैटेगरी में रखा जाता है|
  3. भारतीय सेवा में सम्मिलित कर्नल या उससे ऊपर रैंक के अधिकारी नौसेना, वायु सेना, अर्धसैनिक बलों के समान रैंक के अधिकारी क्रीमीलेयर के अंतर्गत आते हैं
  4. शहरी क्षेत्र में जिन व्यक्तियों का कृषि भूमिया या रिक्त भूमि निश्चित दायरे से अधिक होती है क्रीमी लेयर के अंतर्गत आते है 
  5. जिस व्यक्ति का सालाना आय 4.50-6 लाख से ऊपर है 2013 के अनुसार Creamy layer के अंतर्गत शामिल किए जाएंगे |

लोक नियोजन के आधार पर अवसर की समता अनुच्छेद 16 के अनुसार :-

Fundamental Rights of India :- राज्य के अधीन किसी भी पद का नियोजन या नियुक्तिकरण प्रक्रिया के दौरान सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान किया जाएगा किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव धर्म, वंश ,जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर नहीं किया जाएगा|

अस्पृश्यता का अंत अनुच्छेद 17 के अनुसार :- अस्पृश्यता को समाप्त करने की व्यवस्था और किसी भी रूप में आचरण निषिद्धि करता है 1976 में अस्पृश्यता अपराध अधिनियम 1955 के मूलभूत संशोधन के अनुसार मैसूर उच्च न्यायालय के अनुच्छेद 17 के मामले में व्यवस्था की शाब्दिक और व्याकरण समझ से परे शब्द का प्रयोग ऐतिहासिक है

  • इसके तहत 6माह का कारावास और ₹500 का दंड अथवा दोनों शामिल हो सकता है
  • किसी व्यक्ति को सार्वजनिक पूजा स्थल में प्रवेश से रोकने पर
  • किसी दुकान या होटल या सार्वजनिक मनोरंजन स्थल में प्रवेश से रोका जाना रोके जाने पर
  • अस्पताल शैक्षणिक संस्थान या हॉस्टल मैं सार्वजनिक हित के लिए प्रवेश से रोके जाने पर
  • प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप अस्पृश्यता का मानन करने पर
  • किसी व्यक्ति को सामान बिक्री या सेवा देने से रोकने पर
  • किसी दुकान होटल या सार्वजनिक मनोरंजन स्थल में प्रवेश से रोकने पर इत्यादि निम्नलिखित विषयों पर भेदभाव पाए जाने पर कानूनी की कार्रवाई की जा सकती है |

उपाधियों का अंत अनुच्छेद 18 के अनुसार :-

  • यह स्पष्ट स्पष्ट किया गया है कि औपनिवेशिक राज्य के समय दिए गए वंशानुगत पद जैसे महाराज, राजबहादुर, रायबहादुर, राजा साहब, दीवान बहादुर इत्यादि को अनुच्छेद 18 के तहत प्रतिबंधित किया गया क्योंकि यह राज्य के समक्ष समानता के अधिकार के विरुद्ध नामावलियां है |
  • पद सम्मान और उपाधियां में विभेद को समझें :- राज सेना या विद्या संबंधी सम्मान तथा पद्म विभूषण, पद्म भूषण, और पद्मश्री यह पुरस्कार हैं ना की उपाधि जबकि ब्रिटिश शासन काल के दौरान महाराज, राजबहादुर, रायबहादुर, राज साहब, दीवाने बहादुर, उपाधियों का अनुच्छेद 18 के अनुसार अंत कर दिया गया |
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स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)

(अनुच्छेद-19)के अनुसार 6 मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है जैसे :-

  1. वॉक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
  2. शांतिपूर्वक और निरायुद्ध सम्मेलन का अधिकार
  3. संघ बनाने या सहकारी समितियां बनाने का अधिकार
  4. भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र बिना रुकावट के संरक्षण का अधिकार
  5. भारत के राज्य क्षेत्र में किसी भी भाग में निर्बाध(विना रोक टोक) घूमने और आवास बनाने का अधिकार
  6. व्यापार या कारोबार करने का अधिकार

अनुच्छेद 19 के अंतर्गत 7 मौलिक अधिकार मूल संविधान में रखा गया था परंतु सातवां मौलिक अधिकार संपत्ति को खरीदने अधिग्रहण करने या बेच देने के अधिकार को 44वा संविधान संशोधन 1978 ई में समाप्त कर दिया गया वर्तमान संविधान में 19 के अंतर्गत 6 ही अधिकार हैं |

अपराध के लिए दोस्त सिद्धि के संबंध में संरक्षण अनुच्छेद-20 के अनुसार :-

  1. किसी व्यक्ति को अपराध के लिए तब तक अपराधी नहीं माना जाएगा जब तक दोस्त सिद्ध नहीं हो जाता |
  2. किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए एक बार से अधिक दंड नहीं दिया जा सकता |
  3. किसी भी व्यक्ति को स्वयं के प्रति अभियुक्त अर्थात स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाद नहीं किया जा सकता |

प्राय दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद – 21 :-

Fundamental Rights of India : किसी व्यक्ति को उसके प्राण अर्थात दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं सरल शब्दों में कहे तो व्यक्ति कानून के अनुसार ही इच्छा मृत्यु प्राप्त कर सकता है अन्यथा सुसाइड करते हुए यदि कोई व्यक्ति बच जाता है तो उसके प्रति कानूनी कार्य वाही की जाएगी इच्छामृत्यु का प्रावधान भारतीय संविधान में नहीं है 

Fundamental Rights of Indian Constitution : अनुच्छेद 21 के अनुसार उच्चतम न्यायालय में मेनका मामले में अपने फैसले को दोबारा स्थापित किया और निम्नलिखित बिंदुओं पर आदेश दिया :-

  • जीवन रक्षा का अधिकार
  • निजता का अधिकार
  • आश्रय का अधिकार
  • स्वास्थ्य का अधिकार
  • मानवीय प्रतिष्ठा के साथ जीने का अधिकार
  • 14 वर्ष की उम्र तक निशुल्क शिक्षा का अधिकार
  • कानूनी सहायता का अधिकार
  • स्वच्छ पर्यावरण प्रदूषण रहित जल एवं वायु में जीने का अधिकार
  • हानिकारक उद्योगों के विरुद्ध सुरक्षा
  • अकेले कारावास में बंद होने के विरुद्ध अधिकार
  • अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध अधिकार
  • त्वरित सुनवाई का अधिकार
  • हथकड़ी लगाने के विरुद्ध अधिकार
  • देर से फांसी के विरुद्ध अधिकार
  • बंधुआ मजदूरी करने के विरुद्ध अधिकार
  • विदेश यात्रा करने का अधिकार
  • हिरासत में शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का अधिकार
  • सरकारी अस्पताल में समय पर उचित इलाज का अधिकार
  • राज्य के बाहर न जाने का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार
  • कैदी के लिए जीवन की आवश्यकताओं का अधिकार
  • महिलाओं के साथ आदर और सम्मानपूर्ण व्यवहार करने का अधिकार
  • सोने का अधिकार(बाबा राम देव का सहयोग से)
  • सूचना का अधिकार
  • प्रतिष्ठा का अधिकार
  • सार्वजनिक फांसी के विरुद्ध अधिकार
  • सामाजिक सुरक्षा और परिवार के संरक्षण का अधिकार
  • शोर प्रदूषण से मुक्ति का अधिकार
  • विद्युत का अधिकार
  • सामाजिक एवं आर्थिक न्याय एवं सशक्तिकरण का अधिकार
  • सामाजिक सुरक्षा और परिवार के संरक्षण का अधिकार, आदि अधिकारों का अनुच्छेद 21 के अनुसार चर्चा किया गया है

गिरफ्तारी के विरुद्ध अधिकार अनुच्छेद अनुच्छेद-22 के अनुसार :-किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी, निरोध से संरक्षण अनुच्छेद 22 के द्वारा प्रदान किया गया है हिरासत मुख्यतः दो प्रकार की होती है

  • दंड विषयक हिरासत एक व्यक्ति को दंड दिया जाता है अर्थात अदालत में उसे दूषित ठहराया जा चुका है जिसे अपना दोस स्वीकार कर लिया हो
  • दूसरा जिसमें बिना सुनवाई के अदालत में दोसी ठहराया जाए इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को पिछले अपराध पर दंड न देकर के ऐसे अपराध न करने की चेतावनी देने जैसा होता है
  • गिरफ्तार करने के आधार पर सूचना देने का अधिकार
  • मजिस्ट के सम्मुख 24 घंटे के अंदर यात्रा का समय जोड़कर पेश होने का अधिकार

शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)

अनुच्छेद 23 के अनुसार (Maulik Adhikar kya hai)

  • मानव दुर्य व्यापार, बेकार या बलात श्रम या बंधुआ मजदूरी और इसी प्रकार के अनेक अन्य बलात श्रम के प्रकारों पर भी प्रतिबंध लगाता है
  • मानव दुर्य व्यापार से तात्पर पुरुष महिला एवं बच्चों की वास्तु के समान खरीदारी और बिक्री पर प्रतिबंध इसके अंतर्गत महिलाओं और बच्चों के अनैतिक दूर व्यापार और वेश्यावृति शामिल है तथा देवदासी और दास प्रथा इसी के अंतर्गत आता है |

कारखाने में बालकों के नियोजन पर प्रतिबंध अनुच्छेद 24 के अनुसार :-

  • किसी फैक्ट्री, खान अथवा अन्य संकटमय कार्य वाले गतिविधियों या निर्माण कार्य या रेलवे में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का नियोजन पर अनुच्छेद 24 के द्वारा लगाया जाता है हालांकि सामान्य कार्यों के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है |

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28) तक :-

अनुच्छेद 25 के अनुसार :-

  • प्रत्येक व्यक्ति को अंतरण की स्वतंत्रता और धर्म के अवाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार है
  • अनुच्छेद 26 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक कैंप मूर्ति परियोजनाओं के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण का अधिकार प्राप्त है
  • अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंध करने का अधिकार अनुच्छेद 26 के द्वारा प्रदान किया गया है

धार्मिक अभिवृद्धि के लिए करारोपण से मुक्ति अनुच्छेद-27 के अनुसार :-

  • किसी भी व्यक्ति को किसी विशिष्ट धर्म या धार्मिक संप्रदाय की अभिवृद्धि या पोषण में व्यय करने के लिए करारोपण के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा

धार्मिक शिक्षा में उपस्थित होने की स्वतंत्रता अनुच्छेद 28 के अनुसार :-

  • इसके अंतर्गत राज्य की निधि से पूर्णतया चलायमान हो किसी भी शिक्षण संस्थान में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए हालांकि यह व्यवस्था उन संस्थानों में लागू नहीं होती जिनका प्रशासन राज्य कर रहा है लेकिन उसकी स्थापना किसी विन्यास या न्यास के अधीन हो |

संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (Article 29 और 30) :-

अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण अनुच्छेद 29 के अनुसार :-

  • भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के किसी भी अनुभाग को जिसकी अपनी बोली, भाषा, लिपि, संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार है इसके साथ ही किसी भी नागरिक को संस्थान या धर्मजाति या भाषा के आधार पर प्रवेश से रोक नहीं जा सकता

शिक्षण संस्थानों की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार अनुच्छेद 30 के अनुसार :-

  • Maulik Adhikar kya hai :- सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षण संस्थानों की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार है

संपत्ति का अधिकार Article 31 :-

परीक्षा की दृष्टि दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु है संपत्ति का अधिकार 44 में संवैधानिक संशोधन अधिनियम के द्वारा 1978 ईस्वी में इस मूल अधिकार हटा करके संविधान के भाग-12 (अनुच्छेद-300 क) के तहत मात्र कानूनी अधिकार बना दिया गया, वर्तमान संविधान में 6 fundamental rights प्रदान किया गया है |

संवैधानिक उपचारों का अधिकार Article 32 

  • मूल अधिकारों के संरक्षण का अधिकार स्वयं में ही मूल अधिकार है यही व्यवस्था मूल अधिकारों को वास्तविक बनती है इसलिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद-32 को संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद बताया एक अनुच्छेद जिसके बिना सविधान अर्थहीन है यह संविधान की आत्मा और हृदय है
  • अनुच्छेद-32 के द्वारा प्रदान किया गया अधिकार स्वयं ही मूल अधिकार है मूल अधिकारों का हनन होने पर उच्चतम न्यायालय में जाने का अधिकार प्रदान करता है
  • हालांकि उच्चतम न्यायालय का आदेश है कि जब तक 226 के तहत संबंधित दल के पास उच्च न्यायालय के माध्यम से राहत का विकल्प मौजूद है तो उसे पहले उच्च न्यायालय ही जाना चाहिए |

रिट क्या है और इसके प्रकार, क्षेत्र :-

  • अनुच्छेद-32 के तहत उच्चतम न्यायालय तथा अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के द्वारा महत्वपूर्ण पांच प्रकार की रिट जारी करने का प्रावधान है
  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण
  2. परमादेश
  3. प्रतिषेध
  4. उत्प्रेषण
  5. अधिकार पृच्क्षा
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सशस्त्र बल एवं मूल अधिकार अनुच्छेद-33 के अनुसार

संसद को यह अधिकार देता है कि वह सशस्त्र बलों,अर्धसैनिक बलों, पुलिस वालों, खुफिया एजेंसी, एवं अन्य के मूल अधिकारों पर युक्त प्रतिबंध लगा सके अर्थात इस व्यवस्था का उद्देश्य समुचित कार्य करने से हैं उनके बीच अनुशासन बनाए रखना है |

मार्शल-लॉ अधिकार Article 34 के अनुसार

अनुच्छेद 34 मूल अधिकारों पर तब प्रतिबंध लगाता है जब भारत में कहीं भी मार्शल लॉ लागू हो या संसद को इस बात की शक्ति देता है कि किसी भी सरकारी कर्मचारियों को या अन्य व्यक्ति को उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य की व्यवस्था को बरकरार रखे या पुनर्निमित करें सांसद किसी मार्शल लॉ वाले क्षेत्र में जारी दंड या अन्य आदेश को वैधता प्रदान कर सकता है |

संबंधित मामले में संसद के द्वारा बनाए गए क्षतिपूर्ति नियम को किसी न्यायालय में केवल इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह किसी मूल अधिकार का उल्लंघन है जैसे अभी बीते दिनों में उत्तर प्रदेश सरकार माननीय योगी आदित्यनाथ के द्वारा आगजनी और सरकारी संपत्ति के नुकसान पहुंचाने वालों पर क्षतिपूर्ति का दंड दिया गया था |

कुछ मूल अधिकारों का प्रभाव Article 35 के अनुसार

अनुच्छेद 35 केवल संसद को कुछ विशेष मूल अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है

निषकर्ष :-  Maulik Adhikar kya hai, Fundamental Rights In Hindi संविधान भाग-3 की पूरी जानकारी से आप लोगो को जरुर हेल्प मिला होगा ऐसी मै आपेक्षा करता हूँ “धन्यवाद”

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