Type Of Soil In India,भारत में मिट्टी के प्रकार, अथवा मृदा अपरदन, मृदा संस्तर क्या है

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (दिल्ली) ने भारत की मिट्टी को 6 भागों में विभाजित किया है आपको बेसिक जानकारी के लिए बता दे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और भारत की प्रत्येक राज्य में उत्पाद-विभिन्नता का आधार मृदा है, सहज अध्यन के लिए ( 8-जलोढ़ मिट्टी,काली मिट्टी,लाल मिट्टी,लैटराइट मिट्टी,पर्वतीय मृदा,शुष्क एवं मरुस्थलीय मृदा, लवणीय एवं क्षारीय मृदा,गिली और दलदली मृदा ) वर्गों में विभाजित करके पढेंगे , तो दोस्तों भौगोलिक स्थिति के आधार पर आज Type Of Soil In India,भारत में मिट्टी के प्रकार, अथवा मृदा अपरदन, मृदा संस्तर क्या है आर्टिकल के माध्यम से मृदा के विषय में विस्तृत वर्णन किया गया है 

Type Of Soil In India,भारत में मिट्टी के प्रकार, अथवा मृदा अपरदन,मृदा संस्तर क्या है
Type Of Soil In India,भारत में मिट्टी के प्रकार, अथवा मृदा अपरदन,मृदा संस्तर क्या है

Type Of Soil In India,भारत में मिट्टी के प्रकार :-

मृदा का निर्माण एक गत्यात्मक परिकल्पना है जिसमें कई कारकों का योगदान है जैसे- चट्टान, जलवायु, वनस्पतियां, उच्चावाच, समय, मृदा में संस्तर (प्रोफाइल)  पाये जाते हैं

  • जब किसी स्थान पर A- प्रोफाइल का विकास होता है तो वहां पर मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है इसे ही जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) कहते हैं
  • जब B-प्रोफाइल स्थाई अथवा विकासशील होता है तो यहां पर स्थाई रूप से मिट्टी रहती है इसे ही क्षेत्रीय मृदा (Zonal Soil) कहते हैं
  • जब B क्षयशील होता है तब यह मृदा स्थाई हो जाती है अर्थात इस मिट्टी को परिवहनकारी माध्यमों द्वारा किसी अन्य स्थान पर जमा कर दिया जाता है इन्हें ही आज क्षेत्रीय मृदा कहते हैं जहां पर क्षेत्रीय अथवा अक्षेत्रीय मृदा दोनों पाई जाती हैं उसे अंत क्षेत्रीय Intrazonal Soil कहते हैं
  • यह यह विभाजन (USDA-यूनाइटेड स्टेट ऑफ डिपार्टमेंट एग्रीकल्चर) के द्वारा किया गया है

जलोढ़ मिट्टी(Alluvial soil) :-

  • Alluvial Soil Meaning in Hindi :बांगर पुरानी जलोढ़ मिट्टी जो (गहरे रंग वाली बलूई) मिट्टी होती है उसे बांगर कहते हैं
  • खादर नवीन जलोधक मिट्टी जो बलूई मिटटी (हल्के रंग वाली) होती है उसे खादर कहते हैं
  • इस मिट्टी का निर्माण नदियाँ, पवन, हिमानियों, के द्वारा अपरदन एवं निक्षेपण से होता है
  • भारत में यह मिट्टी लगभग कुल भूभाग का 40% क्षेत्रफल पर पायी जाती है
  • इस मिट्टी में पोटाश, चुना एवं कार्बनिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं
  • इस मिट्टी में नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी हो जाती है
  • इसलिए कृषि कार्य में यूरिया की बुवाई की जाती है
  • यह मिट्टी उत्तराखंड, उत्तर-प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य-प्रदेश, पंजाब, असम, पश्चिम-बंगाल के क्षेत्र में देखने को मिलता
  • इस मिट्टी में सभी खाद्यान्न मोटे अनाज- गेहूं, चावल, गन्ना, झूठ, पटसन, तथा तिलहन के खेती की जाती है
  • इस मिट्टी में एनपीके की बुवाई की जाती है नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम

काली मिट्टी(Black soil) :-

  1. Black Soil in India : इसका निर्माण ज्वालामुखी लावा के अपक्षय एवं अपरदन से हुआ है
  2. लोहा एवं ह्यूमस के उपस्थिति के कारण इसका रंग काला होता है
  3. यह गीली होकर सूखने पर दरारें पड़ जाते हैं
  4. जिसके कारण नाइट्रोजन, ऑक्सीजन भर जाती है इसीलिए इसकी उर्वरता बढ़ जाती है
  5. इस मिट्टी को रेंगुर एवं कपासी मिट्टी भी कहते हैं
  6. इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं अन्य कार्बनिक तत्वों की कमी होती है
  7. इस मिट्टी में कपास, मोटे अनाज-ज्वार-बाजरा, तिलहन, दलहन, सब्जी, खट्टे फलों की खेती की जाती है
  8. यह महाराष्ट्र, मध्य-प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, में क्रमशः घटते हुए क्रम में पाया जाता है

लाल मिट्टी(Red soil) :-

यह सामान्य से भारी वर्षा वाले क्षेत्र में बेसाल्ट आग्नेय चट्टानों में अपक्षय में अपरदानों से काली मिट्टी का निर्माण होता है और यही रूपांतरित होकर लाल मिट्टी बन जाती है

  • इसलिए इन दोनों मृदाओं को पड़ोसी मिट्टी कहते हैं
  • उच्च भागों में बाजरा, मूंगफली, आलू की खेती की जाती है
  • जबकि निम्न भागों में चावल रागी एवं तंबाकू अथवा सब्जियों की खेती की जाती है
  • इस मृदा में कार्बनिक तत्वों की कमी जबकी जैविक पदार्थ प्रचुर मात्रा में पायी जाता है
  • यह मृदा झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, आंध्र-प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु में पायी जाती है

लैटराइट मिट्टी(Laterite) :-

भारत में वर्षा वाले क्षेत्र में 200 सेंटीमीटर से अधिक मिटटी चट्टानी निश्चलन से इस मिट्टी का निर्माण होता है

  • यह मिट्टी उष्णकटिबंधीय मिट्टी आधार जलवायु एवं पर्वतीय ढलनों पर पायी जाती है
  • भारत में यह मिट्टी पश्चिमी तटीय मैदान में पाई जाती है
  • इसके अलावा शिलांग का पठार मेघालय में यह मिट्टी पायी जाती है
  • हालांकि पश्चिम-बंगाल में भारत के सभी भू-प्राकृतिक क्षेत्र अवस्थित हैं
  • इस मृदा में लोह-ऑक्साइड, एल्युमिनियम-ऑक्साइड की अधिकता पाई जाती है
  • जबकि पोटाश अथवा चुना की कमी पाई जाती है
  • गंधक युक्त मिट्टी में चाय एवं कहवा की खेती की जाती है
  • इसके अलावा रसदार फल एवं सब्जियां पैदा की जाती हैं

पर्वतीय मृदा :-

  • यह एक निर्माणाधीन मिट्टी है
  • ह्यूमस की अधिकता होने के कारण अम्लीय गुण पाया जाता है
  • जिसके कारण इसमें चाय-कॉफी मसाला आम अन्य उष्णकटिबंधीय फल उगाए जाते हैं
  • यह मिट्टी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल-प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल-प्रदेश, सिक्किम, मणिपुर, नागालैंड, केरल, तमिलनाडु में पायी जाती है

शुष्क एवं मरुस्थलीय मृदा(Desert soil) :-

  • इसमें बड़े-बड़े बालू के कण पाए जाते हैं
  • इसमें ज्वार-बाजरा एवं मोटे अनाज की खेती की जाती है

लवणीय एवं क्षारीय मृदा (Saline soils) :-

  • यह मिट्टी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर-प्रदेश, बिहार राज्यों, के उन क्षेत्रों में पायी जाती है
  • जहां पर सिंचाई अधिक मात्रा में की जाती है
  • जब मृदा में सोडियम, मैग्नीशियम की अधिकता हो जाती है
  • लवणीय, कैल्शियम, पोटेशियम अधिकता हो जाने पर क्षारीय, कलर, उसर, चोपन इत्यादि नाम से भी जानते हैं

गिली और दलदली मृदा :-

  • ऐसी मृदा अधिक आद्रता वाली क्षेत्र में पायी जाती है
  • इस मृदा में जैव-विविधता अधिक पायी जाती है
  • वर्तमान में इसका संरक्षण किया जाता है ऐसे क्षेत्र रामसर भूमिया कहते हैं
Type of Soil In India,भारत में मिट्टी के प्रकार, अथवा मृदा अपरदन क्या है
Type of Soil In India,भारत में मिट्टी के प्रकार, अथवा मृदा अपरदन क्या है

मृदा अपरदन क्या है (Soil Erosion) :-

  • किसी स्थान विशेष की मृदा में मात्रात्मक (विनाश) ह्रास ही मृदा अपरदन कहलाता है,
  • जो प्रयः मृदा का संकुचित होना अथवा मृदा संस्तर के छय को प्रदर्शित करता है 

मृदा अपरदन के प्रकार :-

वीहड अपरदन (Spring Erosion) :-

  1. जब जल के बहने के कारण मृदा का ऊपरी संस्तर का कुछ भाग घुलकर बह जाए तो इसे वीहड़ अपरदन (Spring Erosion) कहते हैं
  2. जब तीव्र बहाव के कारण मृदा का उप-मृदा (Sub-Soil) का अपरदन हो जाए तो Rill Erosion कहते
  3. यह अपरदन निर्वाणीकरण के द्वारा अधिक हुआ है
  4. जम्मू कश्मीर में चेनाब, मध्य-प्रदेश उत्तर-प्रदेश, चंबल, दक्षिण-भारत में कावेरी बीहड़ का निर्माण कर रही है

अवमूल्यन (Depredation)

  • मिट्टी के गुणात्मक ह्रास को मृदा का अवमूल्यन कहते हैं
  • जिसके कारण मृदा के पोषक तत्वों का ह्रास होता है
  • मिट्टी अनुपजाऊ हो जाती है

अवनयन (Degeneration)

  • जब मिट्टी में गुणात्मक एवं मात्रात्मक ह्रास होता है तभी इसे मृदा का अवनयन कहते हैं

 

  • Type Of Soil In India
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