पवन क्या है, पवन के प्रकार (Type of Wind In Hindi)

पवन तथा पवन के प्रकार पढ़ने से पहले बेसिक जानकारी जरूर होनी चाहिए “हवा हमेशा उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की तरफ चलती है” पृथ्वी की सतह का तापमान अलग-अलग क्षेत्र विशेष पर अलग-अलग होता है, क्योंकि जलीय स्थान की तुलना में स्थलीय भाग तेजी से गर्म होता है तत्पश्चात गर्म हवा ऊपर उठती है और निम्न वायुमंडलीय दाब के कारण ठंडी हवा खाली स्थान को घेरती है इस निरंतर प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हवाएं बनती हैं, पवन क्या है, पवन के प्रकार (Type of Wind In Hindi) टाइटल के माध्यम से हवाओं को वर्गीकृत करके साधारण भाषा में विस्तार से चर्चा करेंगे तो दोस्तों इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें

पवन क्या है, पवन के प्रकार (Type of Wind In Hindi)
पवन क्या है, पवन के प्रकार (Type of Wind In Hindi)

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पृथ्वी के घूर्णन के कारण इन पवनों पर एक बल कार्य करता है इस बल को कोरियालिस बल कहते हैं जिसके कारण पवने हमेशा उत्तरी गोलार्ध में अपने दाहिने तरफ तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाई तरफ घूम जाती हैं  यह फेरल का नियम है

Type of Wind In Hindi ( पवन क्या है )

  • गतिशील वायु को पवन कहा जाता है यह पृथ्वी की सतह के समांतर चलायमान होता है अथवा पृथ्वी की सतह से 200 मीटर के ऊपर हवा को उपरितन पवन कहते हैं
  • पवन के नामकरण के विषय में, हवा का प्रवाह जिस दिशा से चलना प्रारंभ होती है अर्थात जहाँ से उत्पत्ति होती है वाही नाम दिया जाता है जैसे :- N-E,N-W,S-E,S-W, Westerlies,

हवाओं का वर्गीकरण (Classification of winds)

“Hava” को वर्गीकरण के आधार पर तीन महत्वपूर्ण भागों में विभाजित करके अध्ययन किया जाता है जो निम्नलिखित है

(क) सनातनी पवनें

(ख) सामयिक पवनें

(ग) स्थानीय पवनें

(क) सनातनी पवनें :-

संपूर्ण पृथ्वी पर अक्षांशीय आधार पर पवनों के प्रचलन में स्थाई रूप से साल भर सदावाहिनी पवनों को सनातनी पवनें कहते हैं सनातनी पवनों को वर्गीकरण के आधार पर तीन प्रकार से तीन प्रकार बांटा गया तीन वर्गों में विभाजित किया गया है-

1. व्यापारीक पवनें (Trade Winds) :-

  • व्यापारिक पवनों दोनों गोलार्द्धो में सबट्रॉपिकल हाई प्रेशर बेल्ट (STHPB) से इक्वेटर लो प्रेशर बेल्ट (ELPB) की तरफ अर्थात उपोषण उच्च वायुदाब से उपोष्ण कटिबंधीय विश्वत रेखीय की तरफ चलने वाली सनातनी पवनों को व्यापारिक पवने कहते हैं उत्तरी गोलार्द्ध में यह उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक पवन तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में यह दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवने कहलाती हैं |
  • व्यापारिक पवने एक ही दिशा में बहने वाली पवने हैं फेरलसला के अनुसार व्यापारिक पवने कोरियालिस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध  में अपने से दाहिने तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अपने से बाएं तरफ घूम जाती हैं इसी कारण यह हवाएं विश्वत रेखीय कटिबंध क्षेत्र में आद्रता के साथ संघनित होकर-
  • विषुवत रेखीय क्षेत्र में संघनन के कारन शुष्क और आद्र जलवायु के मिश्रण से वर्षा करती हैं यही वर्षा सांवहानिया वर्ष कहलाती है इक्वेटर यानी कि विश्वत रेखीय क्षेत्र में प्रत्येक दिन व्यापारिक पवनों के कारण वर्षा होती है |
  • सांवहानिया वर्षा भूमध्य रेखा पर प्रतिदिन दोपहर के बाद सामान्य वर्षा होती है अनुकूल दशाएं होने के कारण 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा एवं 18 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पाया जाता है तभी यहां पर संवहनीयवन पाए जाते हैं सदाबहरी वनों में प्रचुर जैव विविधता पाई जाती है दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में बहने वाली अमेज़न नदी घाटी में प्रचुर जैव विविधता पाई जाती है सघन वनस्पति होने के कारण इसे पृथ्वी की फेफड़ा कहते हैं
पवन क्या है, पवन के प्रकार (Type of Wind In Hindi)
पवन क्या है, पवन के प्रकार (Type of Wind In Hindi)

2. पछुआ पवनें (Westerlies)

पछुआ पहने यह पवने दोनों गोलार्द्धो में सबट्रॉपिकल हाई प्रेशर बेल्ट से सब ट्रॉपिकल लो प्रेशर बेल्ट की तरफ अर्थात उपोषण उच्च वायुदाब से शीतोष्ण निम्न वायुदाब की तरफ चलती हैं दक्षिणी गोलार्ध में इन्हें उत्तरी-पश्चिमी पवने कहते हैं तथा उत्तरी गोलार्द्ध में इन्हें दक्षिणी-पश्चिमी पवने कहा जाता है इन्हीं पछुआ पवनों को

  • दक्षिणी गोलार्ध में 40 डिग्री अक्षांश पर गरजती चालीसा कहते है 
  • 50 डिग्री अक्षांश पर परचन्ड पचासा अथवा भयंकर पचास कहा जाता है 
  • 60 डिग्री अक्षांश पर चीखती साठा के नाम से जाना जाता है
  • पछुआ पवने उच्च वायुदाब पेटिका 35-40 डिग्री अक्षांश से 60-65 डिग्री अक्षांश के मध्य, ध्रुवों की तरफ चलने वाली पवनें पछुआ पवनें कहलाती हैं |

3. ध्रुवीय पवनें (Polar Wind)

  • ध्रुवीय पवनें उच्च वायुदाब-कटिबंध से अपध्रुवीय-निम्न वायुदाब कटिबंध की ओर प्रवाहित होने वाली पवनें ध्रुवीय पवने कहलाती हैं इन पवनों की प्रकृति काफी ठंडी और शीतल होती है |
  • उत्तरी गोलार्द्ध में यह पवन उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर तथा दक्षिणी – गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं
  • ध्रुवीय पवनों के कारण महाद्वीपों के पूर्वी तट पर भारी वर्षा होती है ध्रुवीय पवन और पछुआ पवन की प्रकृति अलग-अलग होने के कारण आपस में मिलती हैं तो वताग्र अर्थात शीतोष्ण चक्रवात की उत्पत्ति होती है परिणाम स्वरूप भारी वर्षा होती है |
  • इसका परिणाम 35 से 65 डिग्री अक्षांश के मध्य पूर्वी तट पर मरुस्थलीय भाग लगभग दोनों गोलार्ध में नगण्य पाया जाता है |

(ख) सामयिक पवनें (Seasonal Wind) :-

सामयिक पवने वे पवने होती हैं जो एक निश्चित अवधि में एक निश्चित दिशा में प्रवाहित होती हैं सामयिक पवनें कहलाती हैं इनका सर्वाधिक प्रभाव इनकी दिशा में पड़ने वाले स्थलाकृतियों पर पड़ता है-

1. मानसूनी समीर :

मानसूनी समीर से तात्पर वायुमंडलीय क्षेत्र से, अक्सर बर्फीले क्षेत्र से गुजरती है जिसे ठंडक और वर्षा होती है मानसून के साथ संबंधित होने के कारण मानसूनी हवा कहते हैं |

2. जल एवं स्थल समीर :

जल एवं स्थल समीर से तात्पर उन हवाओं से है जो जल और स्थल से संबंधित हैं अर्थात जल और स्थल से उठी हुई वायुमंडलीय वात गतियां को समाहित किया जाता है इस संबंध हवा में नमी और गर्मी अथवा ठंडक का अनुभव होता है मौसमी गतिविधियों पर प्रभाव डालता है

3. पर्वत एवं घाटी समीर :

पर्वत और घाटी समीर से तात्पर पर्वत और घाटी से संबंधित होना जब हवाएं पर्वत से ऊपर चढ़ती हैं या घाटियों के माध्यम से नीचे उतरती हैं तो इन हवाओं की प्रकृति में भिन्नता पाई जाती है जो स्थानीय मौसम और जलवायु को भलीभांति प्रभावित करते हैं पर्वत और घाटी समीर कहलाते हैं

 

(ग) स्थानीय पवनें (Local Winds) :-

स्थानीय पवन दैनिक तापमान अथवा वायुदाब के कारण विकसित होने वाले पवनो को स्थानीय पवन कहते हैं इन पवनो को अलग-अलग नाम से अलग-अलग क्षेत्र विशेष में संबोधित किया जाता है |

गर्म पवनें :-

गर्म पवन से तात्पर अक्षांशमान अथवा तापमान संबद्धता के कारण वह पवन जो गर्म प्रकृति की होती हैं

ठंडी पवन :

स्थानीय पवन के अंतर्गत ठंडी पवन से तात्पर्य अक्षांशमान / तापमान अथवा मौसम के अनुसार वह पवने जो ठंडी प्रकृति की होती हैं ठंडी पौने कहलाती हैं

किसी स्थान विशेष में चलने वाली विशेष प्रकार की पवनों का स्थानीय पवन कहा जाता है जैसे

  1. चिनूक :- चिनूक का अर्थ होता है हिम खाने वाला यह शुष्क गर्म पवन है जो संयुक्त राज्य अमेरिका में राकी पर्वत के ढालो की ओर कनाडा में चलती है या शीतकाल में हिम को पिघला और सुख देती है इस प्रकार पूरी शीतऋतु में पशुओं को चराने में सुविधा प्रदान करती है
  2. हिम झंझावात ( ब्लीजार्ड ) यातायात शीतल पवन है जिसमें मेघो से हिम वर्षा होती है यह कनाडा संयुक्त राज्य अमेरिका एवं अंटार्कटिका महाद्वीप में चलती है
  3. सिराको :- यह अत्यंत उष्ण धूल भरी पवन है जो सहारा मरुस्थल से भूमध्य सागर की ओर चला करती है या भूमध्य सागर को पार करने के क्रम में आद्रता ग्रहण करती है और माल्टा सिसली और इटली तक पहुंचती है मिश्रा में यह पवने खमसिन, ट्यूनीशिया में चिली, लीबिया में गिवली, के नाम से जानी जाती हैं सिरको को ही इटली में खूनी वर्ष के नाम से जाना जाता है
  4. फाॅन :- यह गर्म और शुष्क पवन है जो पर्वतों के पवनाभिमुख ढालों पर नीचे की ओर चलती है यह अपने उत्तरी आल्प्स पर्वत घाटियों में चलती है इसका सर्वाधिक प्रभाव स्विट्जरलैंड में पड़ता है
  5. ब्रिक फील्डर :- यह एक गर्म शुष्क पवन है जो ऑस्ट्रेलिया के आंतरिक भाग में दक्षिणी पूर्वी तटवर्ती भूमि की ओर ग्रीष्म ऋतु में चलती है
  6. हरमट्टन यह शक्तिशाली उत्तर पूर्वी पवन है जो सहारा मरुस्थल से चलती हैं जब यह पवने गुआना तट पर प्रवेश करती है तब यह यहां के निवासियों को राहत प्रदान करती हैं और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं इसलिए इन पवनो को डॉक्टर विंड्स के नाम से जाना जाता है
  7. सिमूम :- सिमूम उष्ण धूल भरी पवन होती है जिनका तापमान उत्तरी सहारा में 40 डिग्री सेल्सियस से 57 डिग्री सेल्सियस तक रहता है
  8. मिंस्ट्रेल :- यह एक शीतल पवन है जिसका अनुभव रोन, की घाटी (फ्रांस) तथा उसके डेल्टा में होता है
  9. बिल्लीबिल्ली :-  यह ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी पश्चिमी तट पर बहने वाली उष्णकटिबंधीय तीव्र तूफानी पवनें हैं

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Type of Wind In Hindi :-

FAQ :-

Q.1 पवन कितने प्रकार के होते हैं?

पवन के नामकरण के विषय में, हवा का प्रवाह जिस दिशा से चलना प्रारंभ होती है अर्थात जहाँ से उत्पत्ति होती है वाही नाम दिया जाता है जैसे -(क) सनातनी पवनें (ख) सामयिक पवनें (ग) स्थानीय पवनें

Q.2 भारत में प्रसिद्ध पवन कौन सी हैं?

  • लू :- भारतीय उपमहाद्वीप के भारत-गंगा के मैदानी क्षेत्र के उत्तर-पश्चिमी भागों से प्रबल होती है 
  • नार्वेस्टर :- पश्चिम बंगाल में प्रवाहित होती है

Q.3 व्यापारिक पवनें कहाँ पाई जाती है?

व्यापारिक पवनों दोनों गोलार्द्धो में सबट्रॉपिकल हाई प्रेशर बेल्ट (STHPB) से इक्वेटर लो प्रेशर बेल्ट (ELPB) की तरफ अर्थात उपोषण उच्च वायुदाब से उपोष्ण कटिबंधीय विश्वत रेखीय की तरफ चलने वाली सनातनी पवनों को व्यापारिक पवने कहते हैं उत्तरी गोलार्द्ध में यह उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक पवन तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में यह दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवने कहलाती हैं |
 
Q.4 कोरिओलिस बल की परिभाषा क्या है?
 
पृथ्वी के घूर्णन के कारण इन पवनों पर एक बल कार्य करता है इस बल को कोरियालिस बल कहते हैं
 
Q.5 फेरल का क्या नियम है?
 
“पृथ्वी के घूर्णन के कारण इन पवनों पर एक बल कार्य करता है इस बल को कोरियालिस बल कहते है” जिसके कारण पवने हमेशा उत्तरी गोलार्ध में अपने दाहिने तरफ तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाई तरफ घूम जाती हैं  यह फेरल का नियम है