Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार अथवा वन नीति :-

Types Of Forests In India: पर्यावरण एवं मानवीय आवश्यकताओं की दृष्टि से वन अत्यंत महत्वपूर्ण है यह प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक होते हैं वन पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ वायु-प्रदूषण तथा मृदा-प्रदूषण की रोकथाम आदि में भी सहायक होते हैं आर्थिक दृष्टि से वन महत्वपूर्ण है

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1 Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार :-
Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार अथवा वन नीति
Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार अथवा वन नीति

वनों से प्राप्त इमारती लकड़ियों का प्रयोग विभिन्न उद्योगों में होता है औद्योगीकरण एवं शहरीकरण के कारण वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है परिणाम स्वरुप वनों का व्यापक विनाश हो रहा है वनों के विनाश से भूमंडलीय तापमान एवं जलवायु-परिवर्तन, पर्यावरण-प्रदूषण, जैव-विविधता की हानि आदि अनेक समस्या उत्पन्न हुई हैं

Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार :-

भौगोलिक एवं जलवायु संबंधी विशिष्टता के आधार पर भारत में वनों को निम्नलिखित (Types of Forests) प्रकारों में बांट सकते हैं

  1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
  2. उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र पर्णपाती वन
  3. उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन
  4. कटीले वन एवं झाड़ियां
  5. पर्वतीय वन
  6. ज्वारीय वन

उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Types Of Forests In India) :-

उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन 200 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में मिलते हैं

  • इन वनों के वृक्ष वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं
  • इसलिए इन्हें सदाबहार वन कहते हैं
  • उत्तरी सहयाद्री प्रदेशों में वनों को शोला वन के नाम से जाना जाता है
  • इन वनों की लड़कियां कठोर होती हैं तथा वनों की अनेक प्रजातियां मिलती हैं
  • यहां 45 से 60 मीटर तक ऊंचे वृक्ष मिलते हैं मसलों के बागानों के लिए यह वन महत्वपूर्ण है
  • महोगनी, आबनूस, रबर, सिनकोना, बांस, नारियल, बेंत जरूल इन वनों के प्रमुख वृक्ष हैं
  • सदाबहार वन असम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, अंडमान-निकोबार दीप समूह, पश्चिमी घाट, हिमालय की तराई तथा कर्नाटक के पश्चिमी भागों में मिलते हैं
  • अंडमान निकोबार का 95% भाग इन्हीं वनों से अच्छादित है

उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन :-

  1. उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन 100 – 200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं |
  2. यह विशिष्ट मानसूनी वन है एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं |
  3. सागवान, सखूवा, शीशम, आम, महुआ, बांस, खैर, त्रिफला. तथा चंदन आदि इन वनों के प्रमुख वृक्ष हैं
  4. रेल का स्लीपर बनाने में सखुआ की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है
  5. मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र-प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम-बंगाल, झारखंड तथा शिवालिक श्रेणी के भावर व तराई प्रदेशों में इन वनों का विस्तार है |

उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन :-

  • 70 से 100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में यह वन मिलते हैं
  • इन वनों में ऊंचे पेड़ों का अभाव मिलता है
  • बिहार और उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों में यह बन पाए जाते हैं

कटीले वन एवं झाड़ियां :-

  • 50 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के वन पाए जाते हैं
  • यह वन मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, मध्य-प्रदेश, दक्षिण-पश्चिम हरियाणा तथा दक्षिणी-पश्चिमी पंजाब में पाए जाते हैं
  • मध्य-प्रदेश के इंदौर से आंध्र-प्रदेश के कुरनूल तक यह पठार के मध्य भाग में अर्द्ध चंद्राकार पेटी में मिलते हैं
  • यहां के प्रमुख वनस्पतियां बबुल, खैरा, नागफनी और कैक्टस आदि हैं

पर्वतीय वन(Types Of Forests In India) :-

  1. Forests In India भारत के पर्वतीय भागों में पाए जाने वाले वनों को पर्वतीय वन कहते हैं
  2. यहा ऊंचाई के बढ़ते क्रम में जल वायु विभिन्नता के आधार पर उष्णकटिबंधीय से लेकर अल्पाइन वनस्पतियां तक मिलती हैं
  3. हिमालय पर 1500 मीटर की ऊंचाई तक पर्णपाती वन मिलते हैं
  4. 1500 से 2500 मी. तक शीतोष्ण कटिबंधीय चौड़ी पट्टी वाले वन पाए जाते हैं
  5. ओक, देवदार, कार्क, बर्च और मैपिल यहां के प्रमुख वृक्ष हैं
  6. 2500 से 3500 मीटर की ऊंचाई तक कोण धरी वन मिलते हैं
  7. इन वनों में फर, स्प्रूस, चीड, सनोवर, ब्लुपइन के वृक्षों की प्रधानता रहती है
  8. 4500 से 4800 मीटर तक कि यहां टुन्ड्रा तुल्य वनस्पतियां उगती है
  9. पर्वतीय वन सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल-प्रदेश, अरुणाचल-प्रदेश तथा कश्मीर में पाए जाते हैं

ज्वारीय वन (types of forests in india) :-

  • यह भारत के तटीय एवं दलदली क्षेत्रों के बने हैं
  • ऐसे वन मुख्यतः उन भागों में मिलते हैं जहां नदियों का ताजा जल समुद्री खारे जल से मिलता है
  • मैंग्रोव, सुंदरी, कैजुरीना, केवड़ा और बेती यहां के प्रमुख वृक्ष हैं
  • गंगा, गोदावरी, कृष्णा, और कावेरी, आदि नदियों के निम्न डेल्टाई भाग इन वनों के आदर्श उत्पत्ति क्षेत्र हैं
  • यह वस्तुतः उच्च जैविक विविधता युक्त सदाबहार वन ही हैं
  • Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार अथवा वन नीति :-
    Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार अथवा वन नीति :-

प्रशासनिक आधार पर वनों का वर्गीकरण :-

  • Types Of Forests In India: प्रशासनिक आधार पर वनों को निम्नलिखित तीन श्रेणियां में विभाजित किया गया है

आरक्षित वन :-

  • इन वनों की निगरानी सरकार द्वारा की जाती है
  • ऐसे वनों में पेड़ों की कटाई आम लोगों का प्रवेश तथा पशुओं की चराई आदि गतिविधियां निषिद्ध होती हैं

संरक्षित वन :-

  • यह वन भी सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में होते हैं परंतु यहां स्थानीय लोगों को लकड़ी काटने पशुओं की चराई आदि की अनुमति होती है

अवर्गीकृत वन :-

  • Types Of Forests In India: जिन वनों का वर्गीकरण नहीं हुआ है वह इस श्रेणी में आते हैं

सरकार द्वारा लागू की गई वन नीतियां :-

  1. भारत में पहली वन नीति 1894 ईस्वी में ब्रिटिश सरकार द्वारा अपनाई गई
  2. स्वतंत्रता के बाद 1952 ईस्वी में प्रथम राष्ट्रीय वन नीति की घोषणा की गई
  3. 1988 ईस्वी में इस वन नीति में संशोधन किया गया
  4. जैसे देश 33% विभाग पर वृक्षारोपण होना चाहिए
  5.  पारिस्थितिकी संतुलन पूर्ण स्थापित कर पर्यावरण की स्थिरता को बनाए रखने का सुझाव
  6. देश की प्रकृति संपदा का संरक्षण
  7. व्यापक वृक्षारोपण एवं सामाजिक वानिकी कार्यक्रमों को प्रोत्साहन
  8. महिलाओं की भागीदारी से वनो की सुरक्षा में आंदोलन चलाना
  9. ग्रामीण तथा जनजाति लोगों की आवश्यकताओं- ईंधन, चारा आदि की पूर्ति करना
  10. राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों तथा तटवर्ती क्षेत्रों में रेत के टीलों  के बिस्तर पर नियंत्रण
  11. नदियों झीलों और जलाशयों के जल ग्रहण क्षेत्र में भूमि के कटाव में वनों की उत्पादकता में वृद्धि करना
  12. वनों पर दबाव कम करना इत्यादि

सामाजिक वानिकी :-

  • सामाजिक वानिकी कार्यक्रम शुरुआत 1976 ईस्वी में हुई थी
  • कनाडा तथा स्वीडन के तकनीकी सहयोग से चलाई जाने वाला यह केंद्र नियोजित कार्यक्रम है
  • कार्यक्रम को वित्तीय सहयोग विश्व बैंक से मिल रहा है
  • इस कार्यक्रम में गैर सरकारी संगठनों का भी सहयोग लिया जा रहा है
  • कार्यक्रम के द्वारा लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है
  • सामाजिक वानिकी के महत्वपूर्ण उद्देश्य जैसे वन क्षेत्र का विकास,
  • वना रोपड़ द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न करना
  • ईधन, चारा, आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करना
  • इमारती लकड़ी की आपूर्ति करना
  • भूमि संरक्षण मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाना

सामाजिक वानकी के तीन प्रमुख घटक :-

कृषि वानिकी :-

  • वन विभाग द्वारा किसानों को मुफ्त बीज एवं छोटे पौधे देकर अपने खेतों में वृक्षारोपण हेतु प्रोत्साहित करना

सामुदायिक वानिकी :-

  • गांव की सार्वजनिक भूमि पर ग्रामीणों द्वारा वृक्षारोपण सामाजिक वानिकी का स्वयं नियोजित कार्यक्रम है

शहरी वानिकी :-

  • वन विभाग द्वारा पार्को, सड़कों, नहरों, औद्योगिक तथा व्यापारिक स्थलों पर वृक्षारोपण

वृक्ष संरक्षण हेतु आंदोलन :-

चिपको आंदोलन :-

  • चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट थे आंदोलन की शुरुआत 1973 ईस्वी में उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर नामक स्थान से हुई थी इस आंदोलन में आंदोलन कर्ता पेड़ों से चिपक कर उन्हें काटने से बचाते थे

एपिको आंदोलन :-

  • चिपको आंदोलन से प्रेरित इस आंदोलन का केंद्र दक्षिण भारत है एपिको आंदोलन के प्रणेता पांडुरंग हेगड़े हैं आंदोलन के सदस्य पेड़ों का आलिंगन कर उन्हें काटने से बचते हैं इस आंदोलन का नारा है उलिसु बेलेसू मत्तु बलिसु अर्थात बचाओ बढ़ाओ और काम में लोओ

मैत्री आंदोलन :-

  • 1995 ईस्वी में कल्याण सिंह रावत ने उत्तराखंड के ग्वालदम से मैत्री आंदोलन का शुभारंभ किया
  • यह आंदोलन उत्तराखंड की महिलाओं पर आधारित है
  • मैत्री संगठन की अध्यक्षता को बड़ी दीदी नाम से संबोधित किया जाता है

वन संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यक्रम :-

वन महोत्सव :-

  1. केंद्रीय कृषि मंत्री के. मुंशी ने 1950 इस्वी में अधिक वृक्ष लगाओ आंदोलन शुरू किया था
  2. इसे वन महोत्सव नाम दिया गया
  3. इस आंदोलन का उद्देश्य मानव निर्मित वनों का क्षेत्रफल बढ़ाना और जनमानस में वृक्षारोपण की प्रवृत्ति पैदा करना
  4. देश भर में प्रतिवर्ष 1-7 जुलाई तक वन महोत्सव कार्यक्रम मनाया जाता है

हरित भारत अभियान :-

  1. फरवरी 2011 को भारत सरकार द्वारा हरित भारत अभियान को स्वीकृति प्रदान की गई
  2. हरित भारत अभियान जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्रवाई योजना का महत्वपूर्ण अंग है
  3. इस अभियान का लक्ष्य भारत के कुल वनाच्छादित क्षेत्र को 2020 तक दोगुना कर वर्तमान वन क्षेत्र में एक करोड़ हेक्टेयर की वृद्धि करना है
  4. अभियान का उद्देश्य वनों को प्रतिवर्ष लगभग 50 से 60 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने में सक्षम बनाना है
  5. इस अभियान से भारत के कुल वार्षिक कार्बन उत्सर्जन में 6% की कमी होने की संभावना है
Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार अथवा वन नीति :-
Types Of Forests In India: भारत में वनों के प्रकार अथवा वन नीति :-

राष्ट्रीय वानिकी कार्यवाही कार्यक्रम :-

  • 1999 में राष्ट्रीय वन की कार्यवाही कार्यक्रम की शुरुआत की गई इस कार्यक्रम का उद्देश्य आगामी 20 वर्षों में वनों से संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु व्यापक रणनीति एवं दीर्घकालिक योजना का खाका तैयार करना था

राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम :-

  • इस कार्यक्रम की शुरुआत 2002 ईस्वी में की गई थी यह राष्ट्रीय वन के कार्यवाही कार्यक्रम से मिलता-जुलता कार्यक्रम है

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण :-

  1. अक्टूबर 2010 इस्वी में केंद्र सरकार द्वारा नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण स्थापित किया गया
  2. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम वन संरक्षण अधिनियम और जैव विविधता अधिनियम सहित जल एवं वायु प्रदूषण आदि सभी पर्यावरण कानून से संबंधित अपीलय न्यायाधिकरण में की जा सकेंगी
  3. विभिन्न एजेंसियों के बीच पर्यावरण से संबंधित वादों का निपटारा भी इस अधिनियम में हो सकेगा
  4. इस अधिकरण में मंत्रालय में पर्यावरण मंत्री के विरुद्ध भी वाद दायर किया जा सकता है
  5. अधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल पुणे कोलकाता और चेन्नई में स्थापित किए गए हैं न्यायाधिकरण के फैसले के विरुद्ध अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकेगी जुलाई 2011 ईस्वी में अधिकरण ने कार्य करना शुरू किया

वनों से संबंधित महत्वपूर्ण संस्थान :-

  1. उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान :- जबलपुर
  2. वन आनुवंशिकी तथा वृक्ष प्रजनन संस्थान :- कोयंबटूर
  3. शीतोष्ण वन अनुसंधान केंद्र :- शिमला
  4. वन उत्पादकता केंद्र :- रांची
  5. केंद्रीय शुष्क प्रदेश वानिकी अनुसंधान संस्थान :- जोधपुर
  6. वर्षा तथा आर्द्र पर्णपाती वन संस्थान :- जोरहट
  7. काष्ठ विज्ञान तकनीकी संस्थान :- बेंगलुरु
  8. हिमालय वन अनुसंधान संस्थान :- सिमला 
  9. इंदिरा गांधी फॉरेस्ट अकैडमी :- देहरादून
  10. बांस एवं वेद अनुसंधान केंद्र :- आइजोल
  11. सामाजिक वानिकी एवं पर्यावरण केंद्र :- इलाहाबाद
  12. वानिकी अनुसंधान एवं मानव संसाधन विकास केंद्र :- छिंदवाड़ा

FAQ :-

भारत में कितने प्रकार के वन पाए जाते हैं?

  1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
  2. उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र पर्णपाती वन
  3. उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन
  4. कटीले वन एवं झाड़ियां
  5. पर्वतीय वन
  6. ज्वारीय वन

Q.1 सदाबहार वन कहाँ पाया जाता है?

उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन 200 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में मिलते हैं सदाबहार वन पूर्वी और पश्चिमी ढ़लानों जैसे- तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के साथ-साथ असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय, पश्चिम बंगाल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी पाये जाते हैं

Q.2 विश्व वानिकी दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व वानिकी दिवस 21 मार्च को मनाया जाता है

Q.3 अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2023 का विषय क्या है?

The theme for 2023 – “Forests and health”

Q.4 विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है सर्व प्रथम 1973 को मनाया गया था 

Q.5 पर्यावरण दिवस 2023 की थीम क्या है?

पर्यावरण दिवस 2023 की थीम – Beat Plastic Pollution “प्लास्टिक प्रदुषण को समाप्त करना”

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