Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय

Water Conservation Project: जल एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, पृथ्वी का एक-चौथाई भाग जल अच्छादित है परंतु इसमें पीने योग्य जल की मात्रा अत्यंत कम है वैश्विक स्तर पर जनसंख्या वृद्धि तथा आर्थिक विकास के कारण जल की खपत में तीव्र वृद्धि हुई है परिणाम स्वरुप वर्तमान समय में जल-संरक्षण (Water Conservation) की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय के विषय में निबंधात्मक वर्णन किया गया है 

Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय
Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय

Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है

वैश्विक स्तर पर जनसंख्या वृद्धि तथा आर्थिक विकास के कारण जल की खपत में तीव्र वृद्धि हुई है परिणाम स्वरुप वर्तमान समय में जल-संरक्षण (Water Conservation in Hindi) की आवश्यकता है |

  • पृथ्वी के 71% भाग पर जल है
  • धरती पर मौजूद जल की कुल मात्रा 1.4 अरब घन किमी. है
  • इसमें से लगभग 97% महासागरों (खारा या लवणीय होने के कारण पीने एवं घरेलू कार्यों के लिए अनुपयुक्त) है 2.4% ध्रुवो पर बर्फ के रूप में तथा 0.6% भूगर्भीय जल सहित जल चक्र में मौजूद कुल स्वच्छ जल की मात्रा आती है
  • कुल जल की 0.1% मात्र ही स्वच्छ जल के रूप में नदियों एवं झीलो आदि में सतह पर मौजूद जल के रूप में पायी जाती है
  • पृथ्वी पर सिर्फ 3% ही स्वच्छ जल मौजूद है और इसकी 0.007% मात्रा का ही लोग नदियों में झीलों और धाराओं के माध्यम से उपयोग कर पाते हैं
  • फिनलैंड, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और जापान आदि देश जल के मामले में समृद्ध हैं
  • भारत, मोरक्को, बेल्जियम, सूडान, जॉर्डन, आदि देश जल के मामले में विपन्न है।

जल की वैश्विक खपत :-

  • वैश्विक स्तर पर जल का सबसे बड़ा उपभोक्ता कृषि क्षेत्र है
  • विश्व में नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों का लगभग 70% जल कृषि कार्य हेतु प्रयोग में लाया जाता है
  • वैश्विक स्तर पर सिंचाई के लिए प्रतिवर्ष 2000-2555 घन किमी. जल प्रयुक्त होता है
  • उद्योगों एवं ऊर्जा के लिए वैश्विक स्तर पर 20% शुद्ध जल का प्रयोग होता है
  • महाद्वीपीय स्तर पर 45% शुद्ध जल के साथ अमेरिका पहले, 28% के साथ एशिया दूसरे, 15.5% के साथ यूरोप तीसरे स्थान पर तथा 9% शुद्ध जल के साथ अफ्रीका चौथे पायदान पर है
  • महाद्वीपीय स्तर पर प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता अमेरिका में 24000 घन मी. प्रतिवर्ष अफ्रीका में 5000 घन मी. प्रति वर्ष तथा एशिया में 34.01 घन मी. प्रति वर्ष है।
  • ध्यातव्य है कि 2000 घन मी. प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति जल की उपलब्धता निम्न श्रेणी तथा 1000 घन मी. प्रतिव्यक्ति जल की उपलब्धता अभाव वाले श्रेणी में आती है
  • वैश्विक स्तर पर प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष जल की उपलब्धता में व्यापक का असमनता है
  • उदाहरण स्वरूप कुवैत में प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 10 घनमी. है जबकि कनाडा और सूरीनाम जैसे देश में 100000 घनमी. प्रति व्यक्ति है

जल संकट का वैश्विक परिदृश्य :-

  1. संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट की 122 देश पर वॉटरफॉल पीपल वाटर पार्क लाइफ रिपोर्ट के अनुसार भविष्य में 100 देश के लगभग 70 करोड लोग जल संकट का सामना करेंगे
  2. आ 2016 में कैप्टन में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट का मुख्य विषय बैंड सिक्योरिटी पावर एंड ग्लोबल वाटर प्राइस
  3. इस रिपोर्ट के अनुसार 25वीं सदी में जल संकट मानव विकास का सबसे बड़ा खतरा है

जल संकट के समाधान हेतु वैश्विक प्रयास :-

  • वर्ष 1974 में संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य सम्मेलन में जल के उचित प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया
  • जल संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु 1981 से 1990 के दशक को अंतरराष्ट्रीय पेयजल एवं स्वच्छता दशक के रूप में मनाया गया है
  • वर्ष 2003 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मीठे जल का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया
  • वर्ष 2003 में जापान के क्योटो तथा वर्ष 2009 में तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित “वर्ल्ड वाटर फोरम” के अधिवेशन में जल संसाधन के संरक्षण पर बल दिया गया तथा प्रमाणित मात्र के लिए जल सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत कदम उठाए जाने के सुझाव दिए गए
  • 12 से 15 जनवरी 2004 को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विश्व में जल के सार्वभौमिक तथा विवेक संवत उपभोग पर अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन का आयोजन किया गया
  • इस सम्मेलन में 76 देश के 300 से अधिक जल प्रतिनिधियों ने भाग लिया
  • सम्मेलन में जल को मौलिक अधिकार घोषित करने सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया

वर्चुअल वाटर :-

  • अपनी आवश्यकता के लिए हमारे द्वारा प्रत्याशी जल के अलावा हम जल का अप्रत्यक्ष प्रयोग विभिन्न कार्य हेतु जैसे खाना बनाने, पीने या विभिन्न उत्पाद इत्यादि

वॉटर फुटप्रिंट :-

वाटरप्रूफ फुटप्रिंट एक संकेतक है जो उपभोक्ता या उत्पादक द्वारा प्रयुक्त अप्रत्यक्ष जल को मापता है एक व्यक्ति या समुदाय के उपयोग या व्यवसाय हेतु उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए ताजा जल फ्रेशवाटर की आवश्यकता मात्रा को वॉटर फुटप्रिंट कहते हैं

  • एक राष्ट्र का वॉटर फुटप्रिंट देश = (देश के अंदर एक वर्ष में सभी वस्तुओं सेवाओं के उत्पादन हेतु प्रयुक्त जल) + देश के अंदर एक वर्ष में आयातित वस्तुओं एवं सेवाओं में विद्यमान वर्चुअल वाटर
  • प्रति व्यक्ति वॉटर फुटप्रिंट= देश का कुल वाटर प्रिंट प्रतिदेश की जनसंख्या
  • कल उपभोग की दृष्टि से भारत विश्व मैं मैं सबसे बड़ा वॉटर फुटप्रिंट रखता है
Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय
Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय

भारत में जल संसाधन (Water Conservation Project)

राष्ट्रीय जल मिशन :- 

  • 6 अप्रैल 2011 को केंद्र सरकार द्वारा “राष्ट्रीय जल मिशन” को स्वीकृति प्रदान की गई
  • राष्ट्रीय जल मिशन जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (2008) के आठ मिशनों में से एक है
  • मिशन का प्रमुख उद्देश्य एककृति जल संसाधन विकास और प्रबंधन के माध्यम से जल संरक्षण न्यूनतम बर्बादी तथा राज्यों के अंदर और बाहर दोनों जगह इसका अधिक सामान वितरण सुनिश्चित करना है |

इस मिशन के पांच निर्धारित लक्ष्य हैं :- 

  1. सार्वजनिक क्षेत्र में व्यापक जल डेटाबेस तथा जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का मूल्यांकन करना
  2. जल संरक्षण तथा संवर्धन के लिए नागरिकों तथा राज्य कार्यवाही को बढ़ावा देना
  3. अधिक दोहन वाले क्षेत्रों सहित संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना
  4. जल उपयोग कुशलता को 20% तक बढ़ावा देना
  5. बेसिक स्तरीय एकीकृत जल संसाधन के प्रबंधन को प्रोत्साहन देना
  6. इन लक्षणों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न कार्य नीतियां निर्धारित की गई हैं जिन्होंने हित धारकों को सक्रिय भागीदारी के साथ सतत विकास और प्रभावी प्रबंधन के लिए एकीकृत नियोजन की दिशा में अग्रसर किया है

राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद :-

  • मार्च 1983 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद (NWRC) का गठन किया गया
  • प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष और केंद्रीय जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री इसके उपाध्यक्ष हैं
  • केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री संबंध केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल तथा प्रशासक राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद के सदस्य हैं
  • जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव इस परिषद के सचिव हैं

राष्ट्रीय जल नीति :-

  1. राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद द्वारा राष्ट्रीय जल नीति वर्ष 2012 में स्वीकार किया गया
  2. राष्ट्रीय जल नीति 2012 में देश में जल संसाधनों के संरक्षण विकास और बेहतर प्रबंधन के लिए अनेक सिफारिश की गई हैं
  3. राष्ट्रीय जल प्रारूप, कानून, व्यापक अधिनियम. अन्तर्राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के सर्वोत्तम विकास के लिए समग्र कानून की जरूरत पर जोर, जल का कुशल उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उद्देश्यों के लिए जल के इस्तेमाल हेतु मापदण्ड विकसित करना
  4. प्रत्येक राज्य के लिए जल विनियामक प्राधिकरण की स्थापना करना और जल का पुनः इस्तेमाल नीति की कुछ महत्वपूर्ण सिफारिश हैं
  5. नीति में जल संसाधन परियोजना एवं सेवाओं का प्रबंध तथा सामुदायिक सहभागिता पर बल दिया गया है

राष्ट्रीय जल बोर्ड :-

  • सितंबर 1990 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जल बोर्ड का गठन किया गया
  • राष्ट्रीय जल बोर्ड का मुख्य कार्य राष्ट्रीय जल नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा एवं प्रगति की जानकारी राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद को प्रदान करना है
  • संबंध केंद्रीय मंत्रालय के सचिव केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष समस्त राज्य केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव बोर्ड के सदस्य हैं
  • सदस्य (जल आयोजन एवं परियोजना) केंद्रीय जल आयोग इस बोर्ड के सदस्य सचिव हैं

स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन “नमामि गंगे” 

  • 13 मई 2015 को केंद्र सरकार महत्वाकांक्षी फ्लैगशिप कार्यक्रम नमामि गंगे को स्वीकृति प्रदान की गई
  • नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा नदी को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के प्रयास को अगले पांच साल में 20000 करोड रुपए बजट परिवहन के साथ समग्र रूप से एकीकृत करता है
  • कार्यक्रम के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए केंद्र द्वारा परिसंपत्तियों के कम से कम 10 साल तक की अवधि के लिए परिचालन और अनुरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियों योजना और परियोजनाओं के 100% वित्त पोषण करने का निर्णय लिया है
  • इस कार्यक्रम के रूप में 2020 तक प्रदूषण में कमी लाने गंगा के साथ सटे 118 प्राथमिक वाले शहरों के लिए परीशोध की क्षमता में खामियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है
  • खुले में सोच की समस्या से निजात पाने के लिए गंगा के साथ सटी 1632 ग्राम पंचायत में पूर्ण स्वच्छता कवरेज का कार्य किया गया 
  • प्रदूषण फैलाने के लिए मोटे तौर पर चिन्हित उद्योगों को बिल्कुल भी तरल अपशिष्ट ना बहने और रिसने वाले पदार्थों के लिए समायोजित निगरानी केदो की स्थापना का निर्देश दिया गया है
  • हरिद्वार,  ऋषिकेश, गढ़मुक्तेश्वर, मथुरा, वृंदावन, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना, साहिबगंज, कोलकाता और नवदीप जैसे- प्रमुख शहरी केदो के लिए समग्र नदी सात एवं घाट स्वच्छता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है
  • इस कार्यक्रम के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नालों की पर्यावरणीय निगरानी निरीक्षण शामिल होगी

जल क्रांति अभियान:- 

जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2015-16 के दौरान देश में जल संरक्षण एवं प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए जल क्रांति अभियान का आयोजन किया किया गया।

मंत्रालय सभी को शामिल करते हुए एक व्यापक एवं एकीकृत दृष्टिकोण द्वारा अभियान को जन आंदोलन का रूप प्रदान किया

जल क्रांति अभियान के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  • जल सुरक्षा और विकास स्कीमो में पंचायती राज व्यवस्थाओं और स्थानीय निकायों सहित सभी प्रभारी की जमीनी स्तर पर भागीदारी को सुधीर बनाना
  • जल संसाधन के संरक्षण प्रबंधन में परंपरागत जानकारी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहन देना
  • सरकारी गैर सरकारी संगठनों नागरिकों आदि में विभिन्न स्तरों से क्षेत्र स्तरीय विशेषता का उपयोग करना
  • ग्रामीण क्षेत्र में जल सुरक्षा के माध्यम से आजीविका में संवर्धन करना

जल क्रांति अभियान के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य कल्प हैं

  • जल ग्राम योजना
  • मॉडल कमान क्षेत्र विकसित करना
  • प्रदूषण अप सामान
  • जन जागरूकता कार्यक्रम एवं अन्य कार्यक्रम

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड :-

  • केंद्रीय भूमि जल बोर्ड जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत बहुविकेशक वैज्ञानिक संगठन है
  • बोर्ड प्रौद्योगिकियों का विकास और प्रसार करने भारत के भू- जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत विकास और उनके अन्वेषण आकलन संरक्षण वृद्धि प्रदूषण से बचाव एवं आर्थिक परिस्थितियों, क्षमता, दक्षता और समानता के सिद्धांतों पर उनके वितरण सहित प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीतियों की निगरानी एवं क्रियान्वयन करता है

केंद्रीय जल आयोग:- 

  • केंद्रीय जल आयोग का प्रमुख एक अध्यक्ष होता है जिसका दर्जा भारत सरकार के पदेन सचिव के समान होता है। 
  • आयोग का कार्य तीन स्कंधों अभिकल्प एवं अनुसंधान स्कंध जल आयोजन है परियोजना स्कंद तथा नदी प्रबंधन स्कंधों में बांटा हुआ है।
  • केंद्रीय जल आयोग सामान्य बाढ़ प्रबंधन सिंचाई पेयजल आपूर्ति तथा जल विद्युत उत्पादन के उद्देश्य के लिए संबंधित राज्य में जल संसाधनों के नियंत्रण संरक्षण और उपयोग के लिए स्कीम के बारे में संबंधित राज सरकारों के साथ विचार विमर्श करके इन्हें प्रारंभ करने समन्वय करने और विकसित करने का कार्य करता है
Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय
Water Conservation Project: जल संरक्षण क्या है जल संरक्षण के उपाय

रेन वाटर हार्वेस्टिंग (Rain water conservation) :-

( वर्षा जल संरक्षण क्या है इसके चार उद्देश्य बताइए निम्नलिखित है  )

  • रेनवाटर हार्वेस्टिंग वर्षा जल के अधिक उपयोग की एक विधि है
  • इस विधि के अंतर्गत प्राकृतिक एवं कृत्रिम गड्ढों में पूर्ण तथा तालाबों में जल के संग्रहण मकान की छंतो पर वर्षा जल के जमाव तथा उससे संबंध टैंक में उसके भंडारण के प्रयास किए जाते हैं
  • इस जल के अभाव के समय संग्रहित जल का उपयोग संभव है
  • वर्षा जल के संग्रहण की इस विधि से भूमि के जल के भंडारणों में वृद्धि होती है
  • इससे बाढ़ नियंत्रण और सुखे के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है
  • यह एक लागत वाला व पर्यावरण मित्र तकनीकी है जो टिकाऊ विकास के लिए महत्वपूर्ण है
  • वर्तमान में भारत में अधिकांश राज्य इस तकनीक को बढ़ावा दे रहे हैं

राष्ट्रीय जल संभर प्रबंधन योजना :-

  • 7 अक्टूबर 2015 को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय जल संभर प्रबंधन परियोजना नीलांचल को 2142.30 करोड रुपए का परिवहन के साथ स्वीकृति प्रदान की गई
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जल संभर घटक के लिए नीरांचल परियोजना पूर्ववर्ती एकीकृत जल संभर प्रबंधन कार्यक्रम के स्थान पर लाई गई
  • यह परियोजना राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ 9 राज्य आंध्र-प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य-प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, तेलंगाना, में क्रियान्वित किया गया
  • परियोजना से भारत में जल सांभर और वर्षा सिंचित कृषि क्षेत्र प्रबंधन के तौर-तरीकों में संस्थागत बदलाव आएगा

देश की प्रथम नदी सूचना प्रणाली :- 

  • 6 जनवरी 2016 को गंगा नदी के 145 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय जलमार्ग पर भारत की प्रथम नदी सूचना प्रणाली का उद्घाटन किया गया
  • इस परियोजना के अंतर्गत दुरुस्त केदो को हल्दिया, गार्डनरिच घाट, त्रिवेणी, स्वरूपगंज, कुमारपुर, बलिया और फरक्का में स्थापित किया गया
  • इसे रोड पर जहाज की निगरानी और संवाद के लिए फरक्का और गार्डनरिच घाट पर स्वचालित पहचान प्रणाली द्वारा इन दोनों नियंत्रण केंद्रो को स्थापित किया गया।

ड्रिप सिंचाई (सेव वाटर) :- 

  • लघु सिंचाई परियोजना के अंतर्गत की जाने वाली ड्रिप सिंचाई प्रणाली सोच की, कृषि व बागवानी के लिए अत्यधिक उपयुक्त है
  • इस प्रणाली के अंतर्गत सिंचाई संभावित प्रदेशों में पाइप लाइनों का जाल बिछाया जाता है जिसे बूंद-बूंद करके पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचता है रहता है
  • इस पद्धत से जल की खपत में 30 से 40% तक की कमी होती है एंव उत्पादकता में 25 से 30% तक की वृद्धि देखी गई है
  • इस प्रकार यह प्रणाली जल संरक्षण में सहायक है

स्वच्छ जल मौलिक अधिकार:-

  • 28 जुलाई 2010 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई को मौलिक अधिकार के तौर पर मान्यता देने संबंधी प्रस्ताव को पारित किया।
  • प्रस्ताव का उद्देश्य जल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है
  • इस प्रस्ताव के अनुसार- स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल बुनियादी मानवाधिकार हैं जो जीवन के अधिकार का उपयोग करने के लिए आवश्यक हैं
  • प्रस्ताव के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों से यह अपील की गई कि वह स्वच्छ जल एवं स्वच्छता प्रणाली तक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु धन प्रौद्योगिकी तथा अन्य संसाधन उपलब्ध करना ।
  • बोलिविया द्वारा प्रस्तुत यह प्रस्ताव 121 देश के समर्थन से पारित किया गया था

FAQ :- 

Q.1 विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है मुख्या उद्देश्य जल का संरक्षण अथवा स्वक्षता की ओर ध्यान आकर्षित करना
 
Q.2 विश्व जल दिवस 2023 की थीम क्या थी?
 
विश्व जल दिवस 2023 की थीम ‘एक्सीलरेटिंग चेंज‘ अर्थात जल और स्वच्छता संकट को हल करने के लिए “परिवर्तन में तेजी लाना”
 
Q.3 पहली बार विश्व जल दिवस कब मनाया गया?
 
पहली बार (विश्व जल दिवस 22 मार्च 1993) को मनाया गया था |
 
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